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बामुलाहिजा : दतिया की जंग, तबादलों का ट्रेलर और डिजिटल हुंकार

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Jul 28, 2026
06:11 AM
दतिया की जंग, तबादलों का ट्रेलर और डिजिटल हुंकार

- संदीप भम्मरकर

दतिया में नरोत्तम का इम्तिहान

सियासत में कभी-कभी चुनाव उम्मीदवार नहीं, नेता लड़ता है। दतिया की जंग अब सिर्फ बीजेपी प्रत्याशी की नहीं, नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक परीक्षा भी बन चुकी है। पार्टी को अपनी ‘मां’ बताकर कार्यकर्ताओं से फिर मैदान में उतरने की अपील करने वाले नरोत्तम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जीत दिलाने की है। पार्टी ने भी ऐसा माहौल बनाया है कि निष्ठा की कसौटी पर हर कदम तौला जाएगा। उधर बीजेपी अंदरूनी नाराज़गी और बाहरी चुनौती, दोनों से जूझ रही है। अब सत्ता के गलियारों में एक ही सवाल है, दतिया का नतीजा क्या नरोत्तम की दूसरी पारी की पटकथा भी लिखेगा?

लो प्रोफाइल, हाई मिशन

दतिया में इस बार नेताओं की पहचान गाड़ियों से नहीं, कदमों से हो रही है। कांग्रेस ने उपचुनाव में बूथ से लेकर सेक्टर तक पूरा चुनावी गणित बिछा दिया है। दूर-दराज़ से आए विधायक और दिग्गज नेताओं को साफ हिदायत है कि वीआईपी ठाठ-बाट से दूरी रखनी है और स्थानीय नेताओं को पूरा सम्मान देना है। नतीजा यह कि कलफदार कुर्तों की जगह शर्ट, टी-शर्ट और जींस में नेता गांव-गांव घूमते दिखाई दे रहे हैं। मगर जैसे ही किसी बाहरी विधायक के समर्थन में नारे लगते हैं, रणनीतिकारों की धड़कनें बढ़ जाती हैं। गलियारों में चर्चा है, दतिया में इस बार हाई कमान का फॉर्मूला साफ है... लो प्रोफाइल रहो, तभी हाई रिजल्ट मिलेगा।

अभी तो ट्रेलर है, साहब!

सत्ता के गलियारों में सबसे लंबा इंतजार हमेशा अगली लिस्ट का होता है। हफ्ते के आखिर में वही सूची सामने आ गई, जिसके संकेत पिछले 'बामुलाहिजा' में दिए गए थे। कलेक्टरों से लेकर सीएम सचिवालय और इंदौर संभाग तक कई अहम कुर्सियों पर फेरबदल हुआ। लेकिन इसे सिर्फ पहली किश्त ही मानिए। दूसरी सूची लगभग तैयार है, जिसमें कुछ और कलेक्टरों के साथ मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले अफसरों की भी अदला-बदली तय मानी जा रही है। दतिया उपचुनाव के रिजल्ट तक का इंतज़ार कीजिए, जो इस बार बच गए हैं… जरूरी नहीं अगली सूची में भी बच जाएं।

कोलकाता से भोपाल तक कड़ियां

एक गिरफ्तारी… और कई गलियारों में बेचैनी! महाकौशल के एक अरबपति नेता के खजाने में सेंध लगाने का आरोपी अब कोलकाता पुलिस की गिरफ्त में है। चर्चा है कि पूछताछ में मध्य प्रदेश से जुड़े कई नए संपर्कों की परतें खुल रही हैं। कानाफूसी है कि आरोपी के कुछ रसूखदार अफसरों और प्रभावशाली लोगों से करीबी संबंध रहे हैं, जिनके जरिए कथित तौर पर पैसों के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। अब सबकी नजर जांच की अगली चाल पर है। सवाल है कि क्या कोलकाता की जांच की आंच अब भोपाल तक भी पहुंचेगी?

Gen-Z की डिजिटल हुंकार

जनाब, आंदोलन अब सड़क पर नहीं, स्क्रीन पर जन्म लेने लगे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी हलचल ने सोशल मीडिया की ताकत का नया नमूना पेश किया है। एक वायरल मुद्दे ने देखते ही देखते Gen-Z की बड़ी डिजिटल लामबंदी खड़ी कर दी। अब उसी कड़ी में ‘रिजर्वेशन हटाओ’ नाम से एक नया ऑनलाइन अभियान भी तेजी से चर्चा बटोर रहा है। पांच दिन पहले जन्म लेने वाले इस ऑनलाइन अवतार के सोमवार रात तक 5 मिलियन फॉलोअर्स हो चुके हैं। तो सवाल है कि क्या अगला बड़ा आंदोलन हैशटैग से निकलकर सड़कों तक पहुंचने वाला है?

अब डीजीपी की बारी

एक कुर्सी तय होते ही दूसरी कुर्सी की दौड़ शुरू हो जाती है। मुख्य सचिव के नाम पर तस्वीर साफ होने के बाद अब पुलिस मुख्यालय की सबसे बड़ी कुर्सी चर्चा के केंद्र में है। मौजूदा डीजीपी की सेवानिवृत्ति में अभी वक्त है, लेकिन दावेदारों ने अभी से अपने-अपने समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली के गलियारों से लेकर नागपुर तक संपर्कों की चर्चा है। सबसे मजबूत माने जा रहे चेहरे भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। कानाफूसी तेज है कि मेरिट अपनी जगह है… लेकिन आखिरी मुहर किसके नाम लगेगी, यही सबसे बड़ा सस्पेंस है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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