छत्तीसगढ़ : रोजी-रोटी की तलाश गया युवक बना आतंकियों की गोली का निशाना, घर-गांव में पसरा मातम, दहशतगर्दों ने पहले नाम पूछा, फिर दीपक पर बरसा दी गोलियां

सक्ती (छत्तीसगढ़) । रोजी-रोटी की तलाश में घर से हजारों किलोमीटर दूर जम्मू-कश्मीर गया छत्तीसगढ़ का एक युवक दीपक की आतंकी हमले मौत हो गई है। कुलगाम जिले के केल्लम इलाके में शुक्रवार शाम हुए आतंकी हमले में सक्ती जिले के बुंदेली गांव निवासी दीपक रात्रे की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आतंकियों ने धर्म पूछकर युवक को अपनी गोली का निशाना बनाया। बताया जा रहा है दीपक एक साल पहले रोजी-रोटी की तलाश में कुलगाम गया था। इस दर्दनाक घटना की खबर गांव मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि ग्रामीण भी इस हादसे से स्तब्ध हैं।
जानकारी के अनुसार, केल्लम स्थित ईंट भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों के पास पहुंचे आतंकियों ने पहले उनकी पहचान और नाम पूछे। इसके बाद उन्होंने अचानक नजदीक से ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। हमले में दीपक रात्रे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। इस हमले में एक अन्य मजदूर बोपिंदर भी गंभीर रूप से घायल हुआ था, जिसकी शनिवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई।
एक साल पहले बेहतर भविष्य की तलाश में निकला था
दीपक रात्रे बचपन से अपने मामा के घर हरदीडीह (जैजैपुर) में रहकर पढ़ाई करते थे। उनकी शादी भी वहीं से हुई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए करीब एक वर्ष पहले वह अपनी पत्नी और भाई के साथ जम्मू-कश्मीर गए थे। वहां वह ईंट भट्ठे में मजदूरी कर परिवार का सहारा बने हुए थे। किसी ने नहीं सोचा था कि मेहनत की तलाश में गया यह युवा आतंकवाद का शिकार बन जाएगा।
गांव में पसरा सन्नाटा, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दीपक की मौत की सूचना मिलते ही सक्ती प्रशासन सक्रिय हो गया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस टीम रात में ही परिजनों के घर पहुंची और घटना की जानकारी दी। खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बुंदेली गांव में हर घर में शोक का माहौल है और लोगों की आंखें नम हैं। ग्रामीणों ने इस कायराना हमले की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पार्थिव शरीर लाने की तैयारी, सहायता की उठी मांग
प्रशासन मृतक के पार्थिव शरीर को छत्तीसगढ़ लाने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ समन्वय कर रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और हरसंभव सरकारी मदद उपलब्ध कराने की मांग की है। दीपक की मौत ने एक बार फिर उन मजदूर परिवारों की पीड़ा सामने ला दी है, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में घर छोड़ते हैं, लेकिन कई बार किस्मत उन्हें अपनों से हमेशा के लिए दूर कर देती है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
