थाने में रिकॉर्डिंग पर रोक नही : नागरिकों के अधिकार को कोर्ट की मान्यता

गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में साफ किया है कि पुलिस थाने के भीतर फोटो खींचना या वीडियो बनाना कोई गैरकानूनी काम नहीं है। अदालत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति बिना व्यवधान पैदा किए शांतिपूर्वक रिकॉर्डिंग करता है, तो उसे रोका नहीं जा सकता।
यह टिप्पणी जस्टिस Nirzar S. Desai की पीठ द्वारा एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जो पुलिस हिरासत में कथित प्रताड़ना से जुड़ा था। पुलिस की ओर से यह तर्क दिया गया था कि थाने में आम लोगों को वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं होती। इस पर अदालत ने कड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस कानून में ऐसा प्रतिबंध दर्ज है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पुलिस अपनी कार्रवाई नियमों के तहत कर रही है, तो रिकॉर्डिंग से उसे परेशानी नहीं होनी चाहिए।
सरकारी वकील की दलील
सरकारी पक्ष ने जब सीसीटीवी कैमरों का हवाला दिया, तो अदालत ने यह तर्क भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब अधिकांश कैमरे काम ही नहीं कर रहे, तब नागरिकों को रिकॉर्डिंग से रोकना तर्कसंगत नहीं है।
अदालत का स्पष्टीकरण
अदालत ने स्पष्ट किया कि थाना कोई प्रतिबंधित क्षेत्र नहीं है और यहां आफिसियल सीक्रेट एक्ट लागू नहीं होता। इसलिए नागरिक सबूत जुटाने के लिए फोटो या वीडियो बना सकते हैं, बशर्ते वे कानून-व्यवस्था में बाधा न डालें। इस टिप्पणी को न्यायिक पारदर्शिता और पुलिस जवाबदेही की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जो नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक और सशक्त बनाता है।
आलोक त्रिपाठी
खबरों की खोज जारी है। ग्राउंड रिपोर्टिंग में दिलचस्पी। मध्य प्रदेश की खबरनवीसी का खास शौक।
