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Toilet: एक पिता की कथा : "साहब अब तो मेरी बेटी का एडमिशन हो जाएगा?"

खुशी राज

खुशी राज

Apr 20, 2026
12:38 PM
"साहब अब तो मेरी बेटी का एडमिशन हो जाएगा?"

साहब! ये टॉयलेट सीट लगवा लो, बस मेरी बिटिया को दाखिला दे दो...जब बेटी के एडमिशन की गुहार लेकर स्कूल पहुंचा एक मजबूर पिता....

बस्ती (उत्तर प्रदेश): सरकारी सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज में पिछले 67 सालों से बेटियों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है। स्कूल प्रशासन इसके पीछे महिला शौचालय न होने का तर्क दे रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पास ही में स्थित एक निजी स्कूल को फायदा पहुंचाने की एक साजिश है।

बेटी के एडमिशन के लिए पिता की मजबूरी

पिता सिर्फ बेटियों की ढाल नहीं बल्की पूरा आसमान होते हैं, ये तस्वीर जिताना पिता के अपने बेटी को पढ़ाने के जुनून की है तो उससे कही ज्यादा शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली है। बस्ती के एक सरकारी सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज के बाहर एक पिता अपनी साइकिल पर टॉयलेट सीट बांधकर खड़ा है। उसकी मांग कोई आलीशान सुविधा नहीं, बल्कि अपनी बेटी के लिए 'शिक्षा का अधिकार' है। पिता का कहना है कि "साहब, अगर स्कूल में शौचालय नहीं है तो ये सीट रख लो, मैं इसे खुद लगवा दूंगा, बस मेरी बिटिया को दाखिला दे दो।"

शौचालय नहीं तो दाखिला भी नहीं

हैरानी की बात यह है कि इस इंटर कॉलेज में पिछले 67 सालों से बेटियों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है। स्कूल प्रशासन का तर्क है कि स्कूल में 'महिला शौचालय' नहीं है, इसलिए वे छात्राओं का एडमिशन नहीं ले सकते।

साजिश या मजबूरी?

स्थानीय लोगों का आरोप कुछ और ही कहानी बयां करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह शौचालय की कमी नहीं, बल्कि पास के ही एक निजी स्कूल (Private School) को फायदा पहुंचाने की एक सोची-समझी साजिश है। सरकारी स्कूल में एडमिशन न मिलने के कारण गरीब अभिभावक मजबूरी में अपनी बेटियों को महंगे प्राइवेट स्कूल में भेजने या उनकी पढ़ाई छुड़वाने को मजबूर हैं। इस पर एक पिता अपनी बेटी का भविष्य बचाने के लिए एक मजबूर होकर साइकिल पर टॉयलेट सीट लेकर जब स्कूल पहुंचा, तो भी जिम्मेदारों का दिल नहीं पसीजा। प्रशासन ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्यालय के खिलाफ जांच शुरू कर दी है.

प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

जब यह मामला मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब जाकर जिला प्रशासन की नींद टूटी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कठोर जांच शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी बच्चे को बुनियादी सुविधाओं के नाम पर शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।

खुशी राज
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खुशी राज

छात्रों और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रिपोर्टिंग। उत्साही तेवर। तेज़-तर्रार। अहम विषयों पर केंद्रित। लक्ष्य है- समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव।

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