ईरान युद्ध में भारत निभाएगा अहम भूमिका : शांति की पहल पर रक्षा मंत्री ने जर्मनी में दिया बड़ा बयान, पीएम के रुख पर बोले राजनाथ

बर्लिन। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने आधिकारिक दौरे पर जर्मनी पहुंचे। वह पहली बार जर्मनी के दौरे पर गए हैं। उन्होंने अपने संबोधन में ईरान युद्ध में शांति की पहल पर भारत की कोशिशों पर बड़ा बयान दिया है। जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सवाल किया गया कि क्या पश्चिम एशिया संकट के बीच शांति की पहल करने में भारत की कोई भूमिका हो सकती है
सवालों का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह संभावना पूरी तरह से खत्म नहीं की जा सकती। हो सकता है कि भविष्य में ऐसा समय आए जब भारत इस दिशा में अपनी भूमिका निभाए और सफल भी हो। उन्होंने साफ कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से युद्ध खत्म करने की अपील की है। कूटनीतिक मामलों में हमारे प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण बहुत संतुलित है।
यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को गहरा करना
आपको बता दें कि राजनाथ सिंह फिलहाल बर्लिन में हैं जहां भारत और जर्मनी के बीच डिफेंस सेक्टर को लेकर कई स्तर की बातचीत होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल 2026 तक जर्मनी की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को गहरा करना और रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक नया रोडमैप तैयार करना है।
वहीं जब जर्मनी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पश्चिम एशिया में जारी संकट और शांति प्रयासों में भारत की भूमिका को लेकर सवाल पूछा गया। उनसे यह जानना चाहा गया कि क्या भारत इस संघर्ष को खत्म करने में कोई भूमिका निभा सकता है।
संतुलित और शांति के पक्ष में रहता पीएम का रुख
राजनाथ सिंह ने आगे बताया कि भारत के प्रधानमंत्री ने भी दोनों पक्षों से युद्ध खत्म करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का रुख हमेशा संतुलित और शांति के पक्ष में रहता है। इस तरह रक्षा मंत्री ने संकेत दिया कि भारत शांति स्थापित करने के प्रयासों में भविष्य में अहम भूमिका निभा सकता है, हालांकि अभी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
राजनाथ सिंह ने ईरान-अमेरिका युद्ध पर क्या कहा?
राजनाथ सिंह ने बर्लिन में कहा श्जब वे (पीएम मोदी) रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति से मिले तो उन्होंने इस पर चर्चा की। यहां तक कि जब वे ट्रंप से मिले तब भी उन्होंने इस पर चर्चा की और कहा कि कोई समाधान निकाला जाना चाहिए। जिस तरह से भारत आगे बढ़ रहा है आपने देखा ही होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी देश का कोई जहाज गुजर नहीं पा रहा था। अगर कोई अपने 7-8 जहाजों के साथ वहां से गुजर पाया तो वह भारत ही था। ऐसा नहीं है कि अमेरिका भारत को अपना दुश्मन मानता है या ईरान भारत को अपना दुश्मन मानता है। नहीं, बल्कि यह भारत का बहुत ही संतुलित दृष्टिकोण है।
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