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तामसिक भोजन और नशा... : सावन के महीने में गलती से भी न करें ये काम, शिवलिंग को दूध चढ़ाते समय भी इन बातों का रखें ध्यान

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 29, 2026
10:22 AM
सावन के महीने में गलती से भी न करें ये काम, शिवलिंग को दूध चढ़ाते समय भी इन बातों का रखें ध्यान

भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई से होने जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस पावन महीने में पूजा-पाठ, व्रत और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। वहीं, शास्त्रों में कुछ ऐसे कार्य भी बताए गए हैं, जिन्हें सावन के दौरान करने से बचने की सलाह दी जाती है।

तामसिक भोजन और नशे से बनाएं दूरी

सावन के महीने में सात्विक जीवनशैली अपनाने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान लहसुन, प्याज, मांस, मछली और अंडे जैसे तामसिक भोजन से परहेज करने की मान्यता है। इसके साथ ही शराब और किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना चाहिए। माना जाता है कि शुद्ध विचार और सात्विक भोजन से भगवान शिव की आराधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

शिवलिंग पर इन चीजों को चढ़ाने से बचें

सावन में शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व होता है, लेकिन कुछ वस्तुओं को अर्पित करना वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को तुलसी के पत्ते, केतकी का फूल और कटे-फटे या खंडित बेलपत्र नहीं चढ़ाने चाहिए।

मान्यता है कि केतकी के फूल को भगवान शिव ने अपनी पूजा से स्वीकार करना बंद कर दिया था। वहीं, बेलपत्र हमेशा साफ और पूर्ण रूप से ही अर्पित करना शुभ माना जाता है।

दूध चढ़ाते समय रखें सावधानी

शिवलिंग पर दूध अर्पित करना शुभ माना जाता है, लेकिन इसके लिए सही पात्र का उपयोग जरूरी बताया गया है। मान्यता के अनुसार शिवलिंग पर दूध चढ़ाने के लिए तांबे के बर्तन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दूध के लिए पीतल, चांदी या स्टील के पात्र का उपयोग करना शुभ माना जाता है, जबकि तांबे के पात्र से केवल जल अर्पित करने की परंपरा है।

इन कार्यों से भी करें परहेज

सावन के दौरान शरीर पर तेल लगाना, बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटना भी कई धार्मिक मान्यताओं में वर्जित बताया गया है। विशेष रूप से रविवार के दिन तेल मालिश से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा दिन में अधिक समय तक सोने के बजाय भगवान शिव का ध्यान, मंत्र जाप और पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है।

क्रोध और जीवों को नुकसान पहुंचाने से बचें

सावन आत्मिक शुद्धि का महीना माना जाता है। इस दौरान किसी का अपमान करना, कटु वचन बोलना, क्रोध करना या किसी जीव को नुकसान पहुंचाना अशुभ माना जाता है। विशेष रूप से सांप और नंदी को भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है, इसलिए इनका सम्मान करने की मान्यता है।

हरी सब्जियों और बैंगन से भी रखें दूरी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में बैंगन खाने से परहेज किया जाता है। इसके पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण भी बताए जाते हैं, क्योंकि बारिश के मौसम में बैंगन में कीड़े लगने की संभावना अधिक होती है।

सावन का महीना भक्ति, संयम और आत्मिक शुद्धि का समय माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमों के साथ भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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