721 साल बाद बदला भोजशाला माहौल : सनातनियों का जोश रहा हाई, पहली बार नहीं पढ़ी गई जुमे की नमाज, सम्मानित हुए बलिदानियों के परिजन

धार। हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला का आज पहला शुक्रवार रहा। 721 साल बाद भोजशाला का माहौल बदला-बदला नजर आया। एक ओर जहां मुस्लिम पक्ष ने जुमे की नमाज नहीं पढ़ी। वहीं दूसरी ओर सनातनियों का उत्साह चरम पर रहा है। सुबह से मां वाग्देवी के भक्तों की भीड़ लगी रही और विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। दोपहर के समय भक्तों की कुछ ज्यादा ही रही। इस मौके पर भोजशाला के आंदोलन में जान गंवाने के परिजनों और संघर्ष करने वालों को सम्मानित भी किया गया। वहीं भोजशाला परिसर में पुलिस का पहरा रहा। करीब 2500 फोर्स चप्पे-चप्पे पर तैनात रही।
सुबह निर्धारित समय पर हिंदू समाज के श्रद्धालु भोजशाला परिसर में पहुंचे और विधिवत मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना प्रारंभ की। भक्तों ने सबसे पहले माँ वाग्देवी को चुनरी अर्पित की और पुष्पों से उनका पूजन किया। इसके बाद गर्भगृह को आकर्षक और भव्य रूप से सजाया गया। धार्मिक माहौल के बीच पूरा परिसर श्रद्धा और आस्था से भर गया। दोपहर में यहां विशाल महाआरती का आयोजन प्रस्तावित था, लेकिन इसे से टाल दिया गया।

पूरे क्षेत्र में शांति का माहौल
समिति के संरक्षक अशोक जैन ने बताया कि हिंदू समाज की ओर से शुक्रवार दोपहर एक बजे से तीन बजे तक पूजन और महाआरती का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। उन्होंने कहा कि एक भव्य शोभायात्रा निकालने की भी तैयारी थी, लेकिन कुछ कारणों के चलते उसे फिलहाल रद्द कर दिया गया है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में शांति का माहौल बना हुआ है, हालांकि एहतियात के तौर पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लेने खुद मैदान में उतरे एसपी
भोजशाला के बाहरी हिस्से की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए धार एसपी सचिन शर्मा स्वयं मैदान में उतरे हैं। एसपी सचिन शर्मा घोड़े पर सवार होकर अश्वारोही (घुड़सवार) दल के साथ पूरे इलाके में लगातार भ्रमण कर रहे हैं। संवेदनशील मार्गों और भोजशाला के आसपास 200 मीटर के दायरे में पुलिस मार्च जारी है, ताकि शहर में शांति और सुरक्षा का माहौल बना रहे। सुरक्षाकर्मी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और मेटल डिटेक्टर की मदद से भोजशाला के एक-एक पिलर (खंभे) की बारीकी से जांच करते रहे। इसके साथ ही डॉग स्क्वायड की टीम भी भोजशाला परिसर में पहुंच चुकी है और कोने-कोने की तलाशी ले रही है।

भोजशाला आंदोलन के बलिदानियों को श्रद्धांजलि
भोजशाला आंदोलन 2003 के दौरान धार जिले के तीन लोगों की पुलिस गोलीबारी में मौत हो गई थी। हिंदू समाज उन्हें आंदोलन का बलिदानी मानता है। इन बलिदानियों की स्मृति में हिंदू समाज के लोगों ने उनके स्वजनों का पाद पूजन कर सम्मान किया। इस दौरान समाजजनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आंदोलन में दिए गए योगदान को याद किया।
संत मुरारी बापू का हुआ सम्मान
भोजशाला की मुक्ति और उसके पुनर्स्थापन को लेकर हिंदू समाज वर्षों से संघर्ष कर रहा है। आंदोलन के दौरान शहीद हुए युवाओं के परिजनों का आज सम्मान किया जा रहा है। इस अवसर पर विशेष रूप से संत मुरारी बापू का आभार व्यक्त करके सम्मान किया गया। बता दें, संत छोटे मुरारी बापू वर्ष 2003 व 2006 में लाठी चार्ज के दौरान शामिल रहे थे। संघर्ष के दौरान घायल भी हुए थे।
साथ ही, रासुका की कार्रवाई झेल चुके लोगों और उनके परिवारजनों को भी सम्मानित किया गया। इससे पहले हिंदू समाज की ओर से आयोजित एकत्रीकरण कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया था। अब हिंदू समाज के लोग मंडी रोड स्थित अखंड ज्योति मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
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