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ग्वालियर में आज सजेगा श्रीकृष्ण का शाही दरबार : डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान 120 करोड़ के गहनों से होगा दिव्य श्रृंगार

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Sep 04, 2026
04:41 AM
डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान 120 करोड़ के गहनों से होगा दिव्य श्रृंगार

ग्वालियर। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर ग्वालियर का ऐतिहासिक गोपाल मंदिर आज आस्था और राजसी वैभव के अनूठे संगम का गवाह बनेगा। रियासतकालीन परंपरा के अनुसार भगवान राधा-कृष्ण का विशेष श्रृंगार ऐसे दुर्लभ और बेशकीमती आभूषणों से किया जाएगा, जिनकी कुल कीमत 120 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। सोने, चांदी, हीरे, पन्ने, मोती और दूसरे कीमती रत्नों से तैयार इन आभूषणों के दर्शन के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचेंगे।

बैंक लॉकर से निकलेगा करोड़ों का खजाना

जन्माष्टमी के लिए आभूषणों को सुरक्षित लॉकर से निकालने की प्रक्रिया सुबह करीब 10 बजे शुरू होगी। नगर निगम आयुक्त द्वारा गठित समिति सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पहुंचकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत लॉकर खुलवाएगी। इसके बाद पुलिस और अन्य सुरक्षा इंतजामों के बीच आभूषणों को गोपाल मंदिर लाया जाएगा। मंदिर पहुंचने के बाद इनकी सफाई और आवश्यक तैयारियां पूरी कर भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा।

मोती-पन्नों वाला हार सबसे खास

भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार में रत्नजड़ित मुकुट समेत कई दुर्लभ आभूषण शामिल होंगे। इनमें पुखराज, माणिक और पन्ने जैसे कीमती रत्नों की चमक श्रद्धालुओं का ध्यान खींचेगी। राधारानी के लिए करीब तीन तोला वजन का रत्नजड़ित मुकुट तैयार किया जाएगा।

मंदिर के खजाने में मौजूद सात लड़ियों वाला हार विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। इस हार में 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हुए हैं। इसकी अनुमानित कीमत करीब 35 करोड़ रुपए बताई जाती है। वहीं रत्नजड़ित मुकुट की कीमत करीब 25 करोड़ और सोने के मुकुट की कीमत लगभग 1.25 करोड़ रुपए आंकी गई है।

भव्य सजावट और सीधे दर्शन की व्यवस्था

जन्माष्टमी को लेकर गोपाल मंदिर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा। परिसर में फूल बंगला और रंगोली श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण होंगे। भारी भीड़ को देखते हुए एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी, ताकि दूर खड़े भक्त भी भगवान के दर्शन कर सकें। अनुमान है कि करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच सकते हैं।

सुरक्षा के रहेंगे कड़े इंतजाम

भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती के साथ सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। मंदिर में प्रवेश और बाहर निकलने के लिए अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम तरीके से दर्शन कराए जा सकें।

1843 में बना था ऐतिहासिक मंदिर

गोपाल मंदिर का निर्माण सिंधिया राजवंश की महारानी बैजाबाई ने 1843 में कराया था। सफेद संगमरमर से निर्मित यह मंदिर मराठा और यूरोपीय वास्तुकला के मिश्रित स्वरूप के लिए जाना जाता है। गर्भगृह के चांदी से मढ़े दरवाजे इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं। जन्माष्टमी पर करोड़ों के आभूषणों से सजे राधा-कृष्ण के दर्शन एक बार फिर ग्वालियर की ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक आस्था को एक साथ जीवंत करेंगे।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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