शुक्रवार, 4 सितंबर 202607:38:42 AM
Download App
Home/देश

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी पर अलौकिक स्वरूप में सजे महाकाल : दिव्य श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन, भस्म आरती में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’ का जयघोष

admin

admin

Sep 04, 2026
05:49 AM
दिव्य श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन, भस्म आरती में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’ का जयघोष

उज्जैन। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। जन्माष्टमी के अवसर पर बाबा महाकाल का भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में विशेष शृंगार किया गया। इस मनोहारी रूप के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। जैसे ही बाबा महाकाल के दर्शन हुए, पूरा परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा।

ढोल-नगाड़ों के साथ खुले बाबा के कपाट

शुक्रवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद परंपरागत विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट खोले गए। ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के बीच बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक हुआ। मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई पूजा ने मंदिर के वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

विशेष शृंगार में नजर आए बाबा महाकाल

पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को मुकुट धारण कराया गया। जन्माष्टमी के विशेष अवसर को देखते हुए भगवान का श्रीकृष्ण स्वरूप में आकर्षक शृंगार किया गया। झांझ-मंजीरों, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती संपन्न हुई। बाबा के इस दिव्य स्वरूप को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।

महाआरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

महाकाल मंदिर के पुजारी द्वारा विधि-विधान से महाआरती संपन्न कराई गई। भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु बीती रात से ही कतारों में खड़े रहे। मंदिर परिसर में घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और मंत्रोच्चार से आध्यात्मिक माहौल बना रहा।

भस्म आरती की अनूठी परंपरा

परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि बाबा महाकाल की भस्म आरती को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

भस्म आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक वेशभूषा का पालन अनिवार्य है। पुरुषों को धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनकर ही आरती में शामिल होने की अनुमति होती है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण स्वरूप में बाबा महाकाल के दर्शन ने इस बार की भस्म आरती को और भी विशेष बना दिया।

admin
Written By

admin

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें