सोमवार, 14 सितंबर 202611:12:44 AM
Download App
Home/देश

एक दिन... दो आस्थाएं! : हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का खास संयोग

पलक गीते

पलक गीते

Sep 14, 2026
09:13 AM
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का खास संयोग

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का संयोग इस बार धार्मिक रूप से खास माना जा रहा है। एक ओर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना कर रही हैं, तो दूसरी ओर घरों और मंदिरों में भगवान गणेश की स्थापना और पूजा की तैयारियां दिखाई दे रही हैं।

निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा

हरतालिका तीज को सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व वाला व्रत माना जाता है। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, इसी कथा से हरतालिका तीज की धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है।

गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न मुहूर्त

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष शुभ माना जाता है। भोपाल के स्थानीय पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को गणपति स्थापना और पूजा के लिए सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक का समय बताया गया है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर संभव है।

एक ही दिन दो पर्व, आस्था के दो रंग

इस संयोग में एक तरफ महिलाएं व्रत, पूजा और जागरण में शामिल होती हैं, तो दूसरी तरफ गणपति भक्त विघ्नहर्ता के स्वागत और स्थापना की तैयारियों में जुटते हैं। यही वजह है कि मंदिरों और घरों में धार्मिक गतिविधियों का विशेष माहौल देखने को मिलता है।

रातभर जागरण और भक्ति का माहौल

हरतालिका तीज की परंपरा में व्रती महिलाओं के लिए रात्रि जागरण का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं भजन-कीर्तन और सामूहिक पूजा में शामिल होती हैं। पूजा के दौरान शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र के साथ गणेश जी की भी आराधना की जाती है।

गणेश पूजा में किन चीजों का होता है महत्व?

गणेश पूजा में दूर्वा, मोदक, फूल और सिंदूर जैसी पूजा सामग्री का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाते हैं और पूजा-अर्चना के बाद आरती करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणपति को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है।

क्या है इस संयोग की खासियत?

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों ही पर्व अलग-अलग धार्मिक भावनाओं और परंपराओं से जुड़े हैं। एक में शिव-पार्वती की आराधना और अखंड सौभाग्य की कामना प्रमुख है, जबकि दूसरे में भगवान गणेश की पूजा के जरिए सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है।

इस तरह एक ही दिन दोनों पर्वों का संयोग श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का विशेष अवसर बन जाता है।

पूजा और व्रत में रखें इन बातों का ध्यान

निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए। किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर व्रत की कठोरता को लेकर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। वहीं गणेश स्थापना और पूजा के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित माना जाता है।

पलक गीते
Written By

पलक गीते

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें