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बिना पुष्टि टिप्पणी करना उचित नहीं, : गौरव भाटिया मामले में हाईकोर्ट की CJP नेताओं को नसीहत, सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी कही यह बात

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Sep 10, 2026
08:19 AM
गौरव भाटिया मामले में हाईकोर्ट की CJP नेताओं को नसीहत, सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी कही यह बात

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने भाजपा नेता और सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया से जुड़े मानहानि विवाद पर गुरुवार को सुनवाई की। इस दौरान सोशल मीडिया पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरव दास और अशुतोष रांका को न्यायालय की सख्त नसीहत का सामना करना पड़ा। न्यायालय ने दोनों से कहा कि बिना तथ्यों की पुष्टि किसी व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। साथ ही, कोर्ट ने उन्हें सोशल मीडिया से पोस्ट हटाने विचार करने और अपने पक्षकारों से निर्देश लेकर जवाब दाखिल करने को कहा गया। बता दें कि गौरव भाटिया ने इस मामले में दो करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया है।

न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला भाटिया की ओर से दायर दो करोड़ रुपये की मानहानि याचिका पर सुनवाई की। याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके, सौरव दास और अशुतोष रांका को पक्षकार बनाया गया है।

बिना पुष्टि आरोप लगाने पर न्यायालय की आपत्ति

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि विरोध दर्ज कराने के कई तरीके हो सकते हैं। न्यायालय ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि दोनों नेता युवा हैं और उनकी अपनी चिंताएं हो सकती हैं, लेकिन बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी व्यक्ति पर इस तरह सार्वजनिक आरोप लगाना उचित नहीं है।

सौरव दास के वकील ने बताया कि संबंधित टिप्पणी पहले ही हटा दी गई है। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि विवाद केवल उसी टिप्पणी तक सीमित नहीं है और अन्य सामग्री भी प्रकाशित की गई है। न्यायालय ने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन अपनी बात रखते समय भाषा को स्पष्ट, जिम्मेदार और संयमित रखना आवश्यक है।

अदालत ने विवाद सुलझाने की भी दी सलाह

न्यायालय ने भाटिया से भी कहा कि विवाद को सीधे अदालत तक लाने के बजाय किसी अन्य माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती थी। भाटिया ने जवाब दिया कि यह गंभीर मानहानि का विषय है और कथित टिप्पणी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने के कारण उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है।

अंत में न्यायालय ने सौरव दास और अशुतोष रांका के अधिवक्ता को अपने पक्षकारों से निर्देश लेकर अगली सुनवाई में स्पष्ट रुख रखने को कहा। न्यायालय ने दोनों नेताओं से कहा, “आप युवा हैं, आपके सामने लंबा रास्ता है। अदालतों में समय क्यों बिताना चाहते हैं?”

AI से तैयार सामग्री का आरोप

विवाद पांच सितंबर को सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर प्रकाशित एक टिप्पणी से जुड़ा है। भाटिया की ओर से न्यायालय में दावा किया गया कि कथित सामग्री एआई की सहायता से तैयार की गई थी और उसमें उनके नाम से ऐसा कथन जोड़ दिया गया, जो उन्होंने कभी नहीं कहा। याचिका के अनुसार, टिप्पणी में यह गलत रूप से दर्शाया गया कि भाटिया ने स्वतंत्र भारद्वाज को ‘दिमागी नक्सली’ और ‘जातिवादी’ कहा था। यह टिप्पणी भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद सामने आई थी। भारद्वाज पर कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े एक किशोर प्रदर्शनकारी के साथ कथित मारपीट करने का आरोप है।

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