एंटी-चीटिंग बिल पर सरकार की रणनीति तेज : संसद में बिल पेश होने के बाद एनडीए की हाईलेवल मीटिंग, टीएमसी सांसदों की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय

नई दिल्ली। लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इसे लेकर अपनी रणनीति और तेज कर दी है। मंगलवार को संसद भवन परिसर स्थित पार्लियामेंट लाइब्रेरी बिल्डिंग (पीएलबी) में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक बैठक श्मंगल मिलनश् आयोजित की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रियों और गठबंधन के सांसदों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद में बिल को लेकर सरकार की रणनीति तय करना और सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा।
पूर्व तृणमूल नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय
बैठक की सबसे खास बात यह रही कि पहली बार तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई से जुड़े सांसद भी इसमें शामिल हुए। सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायनी घोष की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया। इसे एनडीए के बढ़ते राजनीतिक दायरे और सहयोगी दलों के विस्तार के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
एंटी-चीटिंग बिल को लेकर सरकार का सख्त संदेश
सरकार जिस संशोधन विधेयक को आगे बढ़ा रही है, उसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल और संगठित परीक्षा घोटालों पर प्रभावी रोक लगाना है। प्रस्तावित संशोधन के तहत दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की कैद, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, अवैध संपत्ति की जब्ती और मामलों के तीन महीने के भीतर निपटारे जैसी कठोर व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों से परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनेगी तथा छात्रों के भविष्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
विपक्ष के हमलों का जवाब देने की तैयारी
एनडीए की यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब विपक्ष परीक्षा से जुड़े मुद्दों और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में संसदीय रणनीति, फ्लोर मैनेजमेंट और विभिन्न दलों के बीच समन्वय बैठक का प्रमुख एजेंडा रहा।
मंगल मिलन बना समन्वय का नया मंच
एनडीए की साप्ताहिक रणनीति बैठक को अब मंगल मिलन का नया स्वरूप दिया गया है। इस मंच के जरिए गठबंधन सहयोगियों के बीच संवाद बढ़ाने, संसद में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने और विभिन्न दलों के सांसदों के बीच जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शिवसेना, एलजेपी, टीडीपी, जेडीयू समेत अन्य सहयोगी दलों के नेताओं को भी संसद में मुद्दों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण के लिए जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। सरकार का मानना है कि मजबूत समन्वय और स्पष्ट रणनीति के जरिए संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों को सुचारु रूप से पारित कराया जा सकेगा।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
