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मप्र में निर्णायक मोड़ पर एसकेएम का आंदोलन : 8 सूत्रीय मांगों को लेकर भोपाल कूच पर अड़े किसान, सीमाओं पर लगा पुलिस का पहरा, सुरक्षा घेरे में सीएम हाउस

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 28, 2026
08:41 AM
8 सूत्रीय मांगों को लेकर भोपाल कूच पर अड़े किसान, सीमाओं पर लगा पुलिस का पहरा, सुरक्षा घेरे में सीएम हाउस

भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने सहित आठ सूत्रीय मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की पदयात्रा राजधानी भोपाल के करीब पहुंच चुकी है। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान औबेदुल्लागंज में एकत्र हुए, जहां से उनका अगला पड़ाव भोपाल की ओर बढ़ने का है। आंदोलन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है और राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

भोपाल की सीमाओं पर पुलिस का कड़ा पहरा

किसानों को राजधानी में प्रवेश से रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर सुरक्षा घेरा बना दिया है। औबेदुल्लागंज के टोल नाके और 11 मील क्षेत्र में भारी बैरिकेडिंग की गई है। इतना ही नहीं, पीछे की ओर भी रास्तों को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बैरिकेड लगाए गए हैं, ताकि किसानों की आवाजाही सीमित रखी जा सके। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात हैं।

मुख्यमंत्री आवास के आसपास बढ़ाई गई सुरक्षा

किसानों के प्रस्तावित प्रदर्शन और घेराव की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। किलोल पार्क, स्मार्ट सिटी पार्क और पॉलिटेक्निक चैराहे सहित संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। बैरिकेडिंग के साथ-साथ निगरानी भी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

यातायात पर पड़ा असर, यात्रियों को हो रही परेशानी

किसान आंदोलन का असर यातायात पर भी साफ दिखाई देने लगा है। औबेदुल्लागंज से भोपाल जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर प्रभावित हुआ है। वहीं, जबलपुर की ओर आने-जाने वाले सुल्तानपुर मार्ग पर भी यातायात धीमा पड़ गया है। इससे आम यात्रियों और मालवाहक वाहनों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है।

मांगों पर अड़े किसान, सरकार की नजर हालात पर

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों, विशेषकर मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने सहित आठ सूत्रीय मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं।

राजधानी की ओर बढ़ते किसानों और प्रशासन की सख्ती के बीच प्रदेश में आंदोलन का यह चरण बेहद अहम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार किसानों से बातचीत का रास्ता अपनाती है या आंदोलन और अधिक तेज होता है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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