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बेटी की डोली भी न निकाल सकी! : मऊगंज जिले में दबंगों की दबंगई आई सामने शासकीय रास्ते पर अतिक्रमण कर गेट लगाकर ताला लगाया , दो गांव का संपर्क टूटा

नीलम अहिरवार

नीलम अहिरवार

Jun 23, 2026
10:38 AM
मऊगंज जिले में दबंगों की दबंगई आई सामने शासकीय रास्ते पर अतिक्रमण कर गेट लगाकर ताला लगाया , दो गांव का संपर्क टूटा

मऊगंज। मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले के एक गांव से ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रशासनिक दावों और जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। देवतालाब विधानसभा के ग्राम नौढ़िया नंबर-1 में करीब 60 आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के परिवार वर्षों से अपने घरों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आरोप है कि शासकीय रास्ते पर अतिक्रमण कर गेट लगा दिया गया है और उसमें ताला जड़ दिया गया है। हालात ऐसे हैं कि एक बेटी की शादी के बाद उसकी डोली के लिए भी रास्ता नहीं खुला और विदाई मोटरसाइकिल से खेतों के रास्ते करानी पड़ी.

गामीणों ने व्यक्त किया दर्द

देवतालाब विधानसभा के ग्राम नौढ़िया नंबर-1 की ये तस्वीरें सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की कहानी बयां कर रही हैं। गांव के लोगों का कहना है कि क्षेत्र के विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम कई बार यहां आ चुके हैं। गांव की महिलाएं उन्हें राखी भी बांधती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब राखी का रिश्ता निभाया जाता है तो फिर गांव के लोगों की इस पीड़ा को क्यों नहीं सुना गया।

शासकीय रास्ते पर लगाया गेट और लगाया ताला

गांव की सबसे मार्मिक तस्वीर उस समय सामने आई जब एक बेटी की शादी के बाद उसकी विदाई का समय आया। ग्रामीणों का आरोप है कि रास्ते पर लगा ताला नहीं खोला गया। ऐसे में नवविवाहिता को खेतों की मेड़ों से होते हुए मोटरसाइकिल पर बैठाकर विदा करना पड़ा। गांव वालों का कहना है कि जहां बेटी की डोली के लिए लोग अपने मतभेद तक भुला देते हैं, वहां इंसानियत भी ताले के पीछे बंद नजर आई।

प्रशासन का दावा है वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध है

प्रशासन का दावा है कि गांव के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण इस दावे को खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस रास्ते को वैकल्पिक मार्ग बताया जा रहा है, वहां भी लोहे का गेट लगा हुआ है और अधिकांश समय वह बंद रहता है। ग्रामीणों ने तस्वीरों और वीडियो के जरिए अपनी बात साबित करने का दावा किया है।

बरसात के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है। कई घरों में पानी भर जाता है, गृहस्थी का सामान खराब हो जाता है और रास्ता बाधित होने से लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना हो या किसी गर्भवती महिला को स्वास्थ्य केंद्र ले जाना हो, हर स्थिति में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

न्याय की मांग को लेकर गांव के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग कलेक्ट्रेट भी पहुंचे। हाथों में पर्चे लेकर उन्होंने प्रशासन से सवाल पूछा कि आखिर अपने ही गांव में रास्ते के लिए उन्हें वर्षों से संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की मुलाकात एसडीएम से भी हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।

अब नौढ़िया नंबर-1 के आदिवासी परिवार जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि अपने घरों तक पहुंचने के मूल अधिकार की जरूरत है। सवाल यह है कि आखिर वर्षों से चली आ रही इस समस्या का समाधान कब होगा और क्या प्रशासन ग्रामीणों को उनका रास्ता दिला पाएगा?

एक तरफ विकास और जनकल्याण के दावे हैं, दूसरी तरफ अपने ही घर तक पहुंचने के लिए संघर्ष करते लोग। मऊगंज के नौढ़िया गांव की ये तस्वीरें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों के सामने कई सवाल खड़े कर रही हैं। अब देखना होगा कि इन आदिवासी परिवारों को उनका अधिकार कब मिलता है।

नीलम अहिरवार
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नीलम अहिरवार

17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।

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