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मोदी ने शी को दिखाया रिश्तों का रास्ता: : भारत की मूल चिंताओं को समझना होगा, तभी बढ़ेगा भरोसा

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Sep 16, 2026
04:42 AM
भारत की मूल चिंताओं को समझना होगा, तभी बढ़ेगा भरोसा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हालिया मुलाकात में भारत-चीन संबंधों को लेकर नई दिल्ली की चिंताओं को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान जोर दिया कि दोनों देशों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ने सीमा पर शांति और स्थिरता को जरूरी आधार बताया।

संबंधों के लिए ‘तीन आपसी’ सिद्धांत जरूरी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में भारतीय पक्ष की चिंताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों को आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के तीन सिद्धांतों से निर्देशित किया जाना चाहिए। मोदी और शी की यह मुलाकात 12 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई थी। दोनों नेताओं ने संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिए से आगे बढ़ाने तथा मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने पर जोर दिया था।

सीमा पर शांति को बताया सबसे अहम आधार

भारत ने चीन के साथ रिश्तों में सीमा की स्थिति को लगातार महत्वपूर्ण मुद्दा माना है। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत में कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के बीच संबंधों के निरंतर विकास के लिए आवश्यक आधार है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत और संपर्क के विभिन्न तंत्र सक्रिय हैं। 2020 के पूर्वी लद्दाख घटनाक्रम के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव बढ़ा था। इसके बाद दोनों पक्षों ने सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत की।

तिब्बत और ताइवान पर भारत का रुख कायम

चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान में प्रधानमंत्री मोदी के हवाले से कहा गया कि तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। साथ ही भारत अपनी जमीन से चीन विरोधी गतिविधियों की अनुमति नहीं देता।

भारत की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में इन दोनों मुद्दों का अलग से उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री ने बातचीत में भारतीय चिंताओं को भी सामने रखा और दोनों पक्षों के बीच संवेदनशीलता की आवश्यकता पर जोर दिया।

ताइवान के साथ भारत का संबंध किन क्षेत्रों में

भारत सरकार ताइवान के साथ व्यापार, निवेश, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देती है। वहीं चीन के संबंध में भारत की नीति में सीमा पर शांति, स्थिरता और संवाद को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

तिब्बत के मामले में भारत की आधिकारिक स्थिति भी लंबे समय से दर्ज है। विदेश मंत्रालय के दस्तावेज के अनुसार, 2003 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते में भारत ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र को चीन के जनवादी गणराज्य के क्षेत्र का हिस्सा माना था।

रिश्तों में सुधार के बीच सावधानी भी बरकरार

हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ा है। दोनों देशों के अधिकारियों और नेताओं के बीच बातचीत हुई है तथा सीमा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा जारी रही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों का प्रयास है कि सीमा पर शांति कायम रखते हुए द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाया जाए।

ऐसे में मोदी-शी वार्ता में सामने आया ‘तीन आपसी’ का सूत्र भारत की ओर से रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए रखे गए प्रमुख सिद्धांतों को रेखांकित करता है। भारत ने स्पष्ट किया है कि संबंधों में आगे बढ़ने की प्रक्रिया सीमा पर शांति, आपसी सम्मान और दोनों देशों की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़नी चाहिए।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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