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SCO रक्षा मंत्रियों की बैठकः : आतंकवाद के खिलाफ भारत दोहराएगा ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति,राजनाथ सिंह बिश्केक में करेंगे नेतृत्व

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Apr 27, 2026
07:52 AM
आतंकवाद के खिलाफ भारत दोहराएगा ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति,राजनाथ सिंह बिश्केक में करेंगे नेतृत्व

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक के दौरे पर रवाना हो रहे हैं, जहां वे 28 अप्रैल को होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की अहम बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा, सामरिक सहयोग और वैश्विक स्थिरता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में सदस्य देशों के रक्षा मंत्री आपसी सुरक्षा चुनौतियों, आतंकवाद, और रक्षा सहयोग को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद प्रमुख एजेंडे में

बैठक के एजेंडे में सबसे अहम विषय आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक रणनीति तैयार करना है। भारत इस मंच पर एक बार फिर अपनी स्पष्ट नीति दोहराएगा कि आतंकवाद के किसी भी रूप को स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसके खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति ही एकमात्र प्रभावी रास्ता है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत वैश्विक समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ ठोस और समन्वित कार्रवाई की अपील करेगा।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता को मजबूत करने, और सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए यह बैठक रणनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

पश्चिम एशिया तनाव के बीच बढ़ी बैठक की अहमियत

वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण पश्चिम एशिया में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। इस भू-राजनीतिक स्थिति का असर वैश्विक सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। ऐसे में एससीओ की यह बैठक न केवल क्षेत्रीय, बल्कि वैश्विक स्थिरता के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हो जाती है। संभावना है कि सदस्य देश इस तनाव के प्रभाव को कम करने और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के उपायों पर विचार करेंगे।

द्विपक्षीय वार्ताओं की भी संभावना

बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विभिन्न देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं। इन वार्ताओं में रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी, और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत लगातार यह प्रयास करता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग और संवाद के जरिए सुरक्षा चुनौतियों का समाधान निकाला जाए।

एससीओ और भारत की भूमिका

शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में चीन के शंघाई शहर में हुई थी। यह संगठन एशिया का एक प्रमुख राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा मंच बन चुका है। भारत वर्ष 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना था और 2023 में उसने इसकी अध्यक्षता भी संभाली थी। तब से भारत इस मंच पर सक्रिय भूमिका निभाता आ रहा है।

बिश्केक में होने वाली यह बैठक भारत के लिए अपने रणनीतिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करने और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। भारत का फोकस हमेशा से आतंकवाद विरोधी वैश्विक एकता और स्थिर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर रहा है, जिसे वह इस बैठक में एक बार फिर मजबूती से सामने रखेगा।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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