देवास पटाखा फैक्ट्री विस्फोट : घायल मजदूरों को जिला न्यायालय में किया गया पेश, मजदूरों ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया,परिजनों ने लगाएं लापरवाही के आरोप

देवास से संवाददाता मुर्तज़ा सैफी TV27NEWS
देवास: मध्यप्रदेश के देवास जिले में सोनकच्छ तहसील के टोक कला क्षेत्र स्थित पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में घायल मजदूरों को जिला न्यायालय में पेश किया गया। इस पूरे मामले को लेकर अब भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि जिस हादसे में कई मजदूरों की जान गई, उसे लेकर कार्रवाई और जांच पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।दरअसल, 14 तारीख को सोनकच्छ तहसील के टोक कला क्षेत्र स्थित पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हुआ था। इस हादसे में कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए थे, जबकि आधा दर्जन से ज्यादा मजदूरों की मौत हो चुकी है।इसी मामले में घायल हुए चार मजदूरों को आज देवास जिला न्यायालय में अभिजीत सिंह की कोर्ट में पेश किया गया। पेशी पूरी होने के बाद मजदूरों को बिना नंबर की गाड़ी में कोर्ट परिसर से रवाना किया गया।इस दौरान मीडिया ने मजदूरों से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन वे कुछ भी बोलने की स्थिति में नजर नहीं आए। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जिस घटना ने पूरे प्रदेश और देश में सनसनी फैला दी, उसे जिम्मेदार लोगों द्वारा हल्के में लिया जा रहा है। स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी मामले की गंभीरता के अनुरूप कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

क्या है देवास फैक्ट्री ब्लास्ट मामला
दरअसल मध्य प्रदेश के देवास जिले के एबी रोड स्थित टोंककला क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री में ऐसा भीषण विस्फोट हुआ.जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। धमाका इतना जोरदार था कि उसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी.और घटनास्थल पर मौत का मंजर इतना भयावह था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है.जबकि 15 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। कई मजदूर बुरी तरह झुलस गए.जिन्हें बचाने के लिए राहत और बचाव दल लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला.घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं.और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। वहीं हादसे के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव अस्पताल पहुंचे.जहां उन्होंने घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया और साफ कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि पटाखा फैक्ट्री संचालक पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत कार्रवाई की गई है। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं.ताकि हादसे के लिए जिम्मेदार हर शख्स पर सख्त कार्रवाई हो सके। जांच में सामने आया है कि यह कोई पहला हादसा नहीं था। इसी फैक्ट्री में 14 मार्च को भी आग लग चुकी थी। हादसे के बाद काम बंद कराया गया.गांव की सरपंच की शिकायत के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई कागजों तक सीमित रही और हैरानी की बात ये कि मई महीने में फैक्ट्री का लाइसेंस फिर से रिन्यू कर दिया गया। इतना ही नहीं.पटवारी की रिपोर्ट में भी फैक्ट्री को घनी आबादी और पेट्रोल पंप के बेहद करीब बताया गया था। रिपोर्ट में खतरे का स्पष्ट उल्लेख था.लेकिन सवाल यही है कि जब खतरे की घंटी पहले ही बज चुकी थी. तो आखिर अनुमति किसके दबाव में दी गई?

नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
