होर्मुज पर अटका भरोसा: : इस्लामाबाद वार्ता फेल, ईरान ने आगे की बातचीत के लिए अमेरिका को दिया सख्त संदेश

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। इस्लामाबाद में चली 21 घंटे लंबी मैराथन वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। बातचीत के बाद ईरान का रुख सख्त हो गया है और उसने साफ संकेत दिए हैं कि फिलहाल अमेरिका के साथ अगले दौर की बातचीत की कोई योजना नहीं है।
अमेरिका गंभीर नहीं था — ईरान का आरोप
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, तेहरान का मानना है कि अमेरिका इस वार्ता को लेकर शुरू से गंभीर नहीं था। ईरान का आरोप है कि अमेरिका सिर्फ अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने के लिए बातचीत का दिखावा कर रहा था। ईरानी सूत्रों का दावा है कि अमेरिकी पक्ष ऐसी शर्तें रख रहा था जिन्हें स्वीकार करना संभव नहीं था, जिससे बातचीत टूटने का ठीकरा ईरान पर फोड़ा जा सके।
कई मुद्दों पर सहमति, लेकिन दो बड़े विवाद
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि बातचीत के दौरान कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी, लेकिन दो प्रमुख मुद्दों पर मतभेद कायम रहा। यही मतभेद समझौते में सबसे बड़ी बाधा बने। प्रवक्ता ने यह भी स्वीकार किया कि बातचीत अविश्वास के माहौल में हुई, ऐसे में एक ही बैठक में बड़े नतीजे की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं था। इसके बावजूद ईरान ने कहा कि वह क्षेत्रीय शांति के लिए पाकिस्तान और अन्य सहयोगी देशों के साथ संवाद जारी रखेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा पेच
इस पूरी वार्ता का केंद्र बिंदु था स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है। फिलहाल यह रास्ता बंद बताया जा रहा है। अमेरिका इस समुद्री मार्ग को खुलवाने के लिए दबाव बना रहा था, लेकिन ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि यह फैसला उसकी शर्तों पर ही होगा। यही मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा टकराव बनकर उभरा। लंबी बातचीत के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद से वापस लौट चुके हैं। उम्मीद थी कि यह वार्ता किसी बड़ी सफलता के साथ खत्म होगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
तनाव और बढ़ने के आसार
वार्ता विफल होने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है, और निकट भविष्य में किसी बड़ी प्रगति की संभावना कम दिखाई दे रही है। इस्लामाबाद वार्ता ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं। जब तक दोनों पक्ष अपने रुख में लचीलापन नहीं दिखाते, तब तक समाधान की राह मुश्किल ही बनी रहेगी।
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