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टीएमसी के 20 बागी सांसदों पर शिकंजा : लोकसभा सचिवालय ने थमाया नोटिस, एक सप्ताह के अंदर देना होगा जवाब, अयोग्यता वाली याचिकाओं ने बढ़ाई मुश्किलें

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 26, 2026
08:00 AM
लोकसभा सचिवालय ने थमाया नोटिस, एक सप्ताह के अंदर देना होगा जवाब, अयोग्यता वाली याचिकाओं ने बढ़ाई मुश्किलें

नई दिल्ली। टीएमसी के 20 बागी सांसदों की मुसीबते बढ़ती दिखाई दे रही है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद लोकसभा सचिवालय ने सभी बागी सांसदों को नोटिस जारी कर सात दिनों में अंदर जवाब तलब किया है। टीएमसी से बगावत करने वालों सांसदों में यह एक्शन पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर अयोग्यता याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हुआ है।

लोकसभा सचिवालय की ओर से मंगलवार को जारी किए गए नोटिस में अभिषेक बनर्जी की 18 जून को दायर अयोग्यता वाली याचिकाओं की प्रति भी संलग्न की गई है। यह याचिका दलबदल के आधार पर सांसदों की अयोग्यता से जुड़े वर्ष 1985 के नियमों के तहत दाखिल की गई थी। अब 20 सांसदों को नोटिस मिलने के सात दिन के भीतर अपनी टिप्पणी और जवाब दाखिल करना होगा।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब सर्वोच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में तेजी लाने की मांग पर विचार किया। अदालत ने 20 बागी सांसदों को भी नोटिस जारी किया है। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष और महासचिव को अलग से नोटिस जारी नहीं किया गया।

सर्वोच्च न्यायालय ने साफ किया- समय पर पूरी हो कार्रवाई

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले के सबसे महत्वपूर्ण पहलू की ओर संकेत करते हुए कहा कि सवाल केवल नोटिस जारी करने का नहीं है, बल्कि पूरी कार्यवाही एक निश्चित समयसीमा के भीतर पूरी करने का है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि लोकसभा अध्यक्ष की ओर से 20 सांसदों को नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इस टिप्पणी के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि बागी सांसद क्या जवाब देते हैं और लोकसभा अध्यक्ष की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है।

टीएमसी का आरोप- स्वेच्छा से छोड़ी पार्टी की सदस्यता

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि सभी 20 सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जाना पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के बराबर है। पार्टी इसी आधार पर दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी अयोग्यता की मांग कर रही है।

दूसरी ओर, बागी सांसदों का पक्ष है कि उनका कदम किसी अवैध दलबदल का मामला नहीं, बल्कि दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ वैध विलय के दायरे में आता है। यही विवाद अब पूरे मामले का सबसे बड़ा कानूनी प्रश्न बन गया है।

20 सांसदों के भविष्य पर टिकी नजर

इस विवाद में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, पार्थ भौमिक, सायनी घोष, यूसुफ पठान समेत कुल 20 सांसदों के नाम शामिल हैं। इन सांसदों ने जून में तृणमूल से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ जाने का दावा किया था।

अभिषेक बनर्जी की लगातार दबाव की रणनीति

अभिषेक बनर्जी ने पहले लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल कीं। इसके बाद उन्होंने कार्यवाही में कथित देरी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। अब लोकसभा सचिवालय की ओर से नोटिस जारी होने के बाद मामला निर्णायक चरण की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

यदि सांसदों के जवाब से तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को बल मिलता है, तो उनकी सदस्यता पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। वहीं, यदि वे अपने विलय को कानूनी रूप से वैध साबित करने में सफल रहते हैं, तो तस्वीर पूरी तरह अलग हो सकती है। फिलहाल 20 सांसदों का जवाब ही आगे की राजनीतिक लड़ाई की दिशा तय करने वाला है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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