24 अरब से 50 अरब होंगे यूपीआई लेनदेन! : मोहनदास पई का बड़ा बयान, बताया क्यों जरूरी है एमडीआर

नई दिल्ली। यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने के फैसले को लेकर बहस के बीच आरिन कैपिटल के चेयरमैन और इंफोसिस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी टीवी मोहनदास पई ने इसका समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था का असर यूपीआई के ज्यादातर लेनदेन पर नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक करीब 96 प्रतिशत यूपीआई लेनदेन इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।
70 प्रतिशत भुगतान व्यक्ति से व्यक्ति
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में पई ने कहा कि यूपीआई के लगभग 70 प्रतिशत लेनदेन व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी2पी श्रेणी में आते हैं। इन भुगतानों पर किसी तरह का शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा 2,000 रुपये तक के भुगतान भी शुल्क मुक्त रहेंगे। उनके मुताबिक केवल 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर नाममात्र का एमडीआर लागू होगा।
पई ने स्पष्ट किया कि एमडीआर को टैक्स समझना सही नहीं है। यह बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को दिया जाने वाला शुल्क है। उन्होंने इसकी तुलना क्रेडिट कार्ड से होने वाले भुगतान से की, जिसमें व्यापारी को कार्ड कंपनी और बैंक को प्रसंस्करण शुल्क देना पड़ता है।
2,500 रुपये के भुगतान का उदाहरण दिया
पई ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को 2,500 रुपये का भुगतान करना है तो वह इसे 1,500 और 1,000 रुपये के दो अलग-अलग लेनदेन में कर सकता है। इस तरह दोनों भुगतान 2,000 रुपये की सीमा के भीतर रहेंगे। हालांकि, एमडीआर व्यवस्था को लेकर अंतिम प्रभाव लेनदेन के प्रकार और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
यूपीआई ढांचे पर बढ़ रहा खर्च
पई ने कहा कि यूपीआई प्रणाली को लगातार बेहतर बनाए रखने और बढ़ते लेनदेन का दबाव संभालने के लिए बड़े स्तर पर पूंजी निवेश और परिचालन खर्च की जरूरत होती है। उन्होंने दावा किया कि अतीत में लेनदेन की संख्या अचानक बढ़ने पर यूपीआई में 15 से 30 प्रतिशत तक लेनदेन विफल होने की समस्या भी सामने आई थी।
उनके अनुसार अगले दो वर्षों में यूपीआई लेनदेन की संख्या 24 अरब से बढ़कर 50 अरब तक पहुंच सकती है। ऐसे में सूचना प्रौद्योगिकी ढांचे को और मजबूत करना जरूरी होगा, ताकि बड़ी संख्या में वास्तविक समय के भुगतान बिना बाधा संभाले जा सकें।
लागत को लेकर उठाया सवाल
पई ने सवाल उठाया कि इस तकनीकी ढांचे को उन्नत करने का खर्च कौन उठाएगा। उनका कहना है कि यदि पूरा खर्च बैंक वहन करेंगे तो इसका असर आगे चलकर जमाकर्ताओं पर पड़ सकता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने से सीधे लाभ पाने वाले व्यापारियों को भी लागत का एक हिस्सा वहन करना चाहिए।
यूपीआई की उपलब्धि की सराहना
इस बीच, 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू किए जाने के फैसले पर राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि यूपीआई ने देश को डिजिटल और आर्थिक लेनदेन के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाई है। उनके अनुसार यूपीआई भारत की प्रमुख तकनीकी उपलब्धियों में शामिल है।
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