नीट पेपर लीक मामले में स्पेशल कोर्ट का एक्शन : सीबीआई को अभियोजक नियुक्त करने का फरमान, अब 3 अगस्त को सुनवाई, जमानत पर टला फैसला

नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू विशेष अदालत ने सोमवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए सीबीआई का पक्ष रखने के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का निर्देश दिया। वहीं, सीबीआई की ओर से सुनवाई के दौरान कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं होने के कारण अदालत ने दो आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई 3 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी। यह इस मामले की विशेष अदालत में पहली सुनवाई थी।
सीबीआई का पक्ष रखने कोई अधिवक्ता नहीं पहुंचा
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि सीबीआई की ओर से कोई अधिवक्ता मौजूद नहीं था। इसके बाद न्यायालय ने अभियोजन निदेशक को निर्देश दिया कि मामले की प्रभावी पैरवी के लिए जल्द से जल्द विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया जाए। आरोपियों दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की ओर से अधिवक्ता ए.पी. सिंह अदालत में उपस्थित हुए, लेकिन सीबीआई का पक्ष नहीं रखे जाने के कारण जमानत पर सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
13 आरोपियों में शामिल हैं दोनों आरोपी
दिनेश बिवाल और विकास बिवाल उन 13 आरोपियों में शामिल हैं, जिन्हें परीक्षा से पहले कथित रूप से नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र लीक करने के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। सभी आरोपी 6 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले में 12 मई को एक सरकारी अधिकारी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई।
पेपर लीक मामलों के लिए बनी विशेष अदालत
23 जुलाई को राऊज एवेन्यू न्यायालय में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम-2024 से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत का गठन किया गया। इस कानून के तहत दर्ज सभी मामलों की सुनवाई अब इसी अदालत में की जाएगी, ताकि मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके।
पुलिस कार्रवाई पर उच्चतम न्यायालय में आज सुनवाई
इस बीच, जंतर-मंतर पर नीट अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय मंगलवार को सुनवाई करेगा। सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर गंभीर हमला किया गया था। इस पर न्यायालय ने कहा कि हर व्यक्ति का जीवन समान रूप से महत्वपूर्ण है।
मुख्य न्यायाधीश बोले- शांतिपूर्ण विरोध सभी का अधिकार
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी परिस्थिति में नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों के लिए एक समान व्यवस्था और स्पष्ट नियम होने चाहिए, ताकि नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहें और कानून-व्यवस्था भी बनी रहे। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रदर्शन के नाम पर पुलिस की कथित ज्यादती को उचित नहीं ठहराया जा सकता। अब इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर मंगलवार को विस्तृत सुनवाई होगी।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
