'रामायण' में कैकेयी बनकर छाईं लारा दत्ता : पिता को याद कर हुईं भावुक; बोलीं- काश! आज पापा मेरे साथ होते

मुंबई। महाकाव्य 'रामायण' को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह बना हुआ है। फिल्म में अभिनेत्री लारा दत्ता माता कैकेयी के महत्वपूर्ण किरदार में नजर आ रही हैं। इस खास मौके पर अभिनेत्री भावुक हो गईं और उन्होंने अपने दिवंगत पिता को याद करते हुए एक दिल छू लेने वाला संदेश साझा किया। लारा का कहना है कि काश आज उनके पिता उनके साथ होते और इस खास उपलब्धि को अपनी आंखों से देखते। उन्हें विश्वास है कि आज उनके पिता को उन पर गर्व होता।
माता कैकेयी के किरदार को लेकर भावुक हुईं लारा
लारा दत्ता ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कैकेयी के लुक में कुछ तस्वीरें साझा की हैं। इसके साथ उन्होंने अपने लंबे इंतजार और इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के अनुभव को शब्दों में बयां किया। अभिनेत्री ने लिखा कि कई साल पहले एक दिली इच्छा के रूप में शुरू हुआ यह सपना आज ऐसी कहानी का हिस्सा बन गया है, जो अनंत काल से चली आ रही है। उनके लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि जिंदगी से जुड़ा एक बेहद खास अनुभव है।

बोलीं- कैकेयी इतिहास की सबसे गलत समझी गई महिलाओं में से एक
लारा दत्ता ने माता कैकेयी के किरदार को अपने करियर की बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि कैकेयी इतिहास की सबसे गलत समझी गई महिलाओं में से एक रही हैं। उनके गुस्से, कमजोरियों, अपराधबोध और पछतावे को पर्दे पर जीवंत करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
अभिनेत्री ने उम्मीद जताई कि दर्शक इस कहानी को सदियों से चली आ रही धारणाओं से आगे बढ़कर देखेंगे और रामायण में माता कैकेयी की महत्वपूर्ण भूमिका को समझेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह अपने अभिनय के जरिए इस किरदार के साथ पूरा न्याय कर पाई होंगी।
नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी का जताया आभार
लारा ने इस महत्वपूर्ण किरदार के लिए उन पर भरोसा जताने वाले निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी का विशेष धन्यवाद किया। इसके साथ ही उन्होंने अपने सह-कलाकारों और पूरी फिल्म टीम के प्रति आभार जताया। अभिनेत्री ने इस महाकाव्य का हिस्सा बनने को अपने लिए बड़ा सौभाग्य बताया।
पिता को याद कर छलका दर्द, लिखा- काश आप साथ होते
अपने भावुक संदेश के आखिर में लारा दत्ता ने पिता को याद करते हुए लिखा, "आज मुझे अपने पिता की बहुत याद आ रही है और काश वो यहां मेरे साथ इसे देखने के लिए होते।" उनकी इस बात ने उनके प्रशंसकों का ध्यान खींचा। लारा ने अपने संदेश का समापन करते हुए लिखा कि कुछ कहानियां सिर्फ सुनाई नहीं जातीं, बल्कि उन्हें जिया जाता है, महसूस किया जाता है और अपने भीतर संजोकर रखा जाता है। अंत में उन्होंने लिखा- 'जय श्री राम।'
लारा दत्ता का यह संदेश बताता है कि 'रामायण' का हिस्सा बनना उनके लिए केवल एक पेशेवर उपलब्धि नहीं, बल्कि भावनाओं, आस्था और परिवार से जुड़ा एक यादगार पल भी है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
