दिल्ली एसआईआर : आडवाणी-जयशंकर को नोटिस पर सियासी बवाल, खड़गे ने भाजपा को लिया निशाने पर, कहा- अब अपने ही फंस गए जाल में

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एसआईआर को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत भाजपा से जुड़े कई नेताओं, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और अन्य प्रमुख लोगों को एसआईआर नोटिस मिलने के बाद खड़गे ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरुआत से ही एसआईआर को खामियों से भरी प्रक्रिया बता रही थी, लेकिन अब यही प्रक्रिया भाजपा के लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती दिखाई दे रही है।
‘फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर’ से की तुलना
खड़गे ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि बिहार से शुरू हुआ एसआईआर अब दिल्ली तक पहुंच गया है। उनके मुताबिक, कांग्रेस ने पहले दिन से ही इस पूरी प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर केवल भाजपा द्वारा वोट चोरी और लोकतंत्र को खत्म करने का औजार नहीं है, बल्कि खामियों वाली ऐसी प्रक्रिया है, जो अब उसी के लोगों को फंसा रही है। खड़गे ने इसे ‘फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर’ की संज्ञा दी।
आडवाणी और जयशंकर का किया जिक्र
खड़गे ने दावा किया कि भाजपा के कई बड़े नेताओं को एसआईआर के तहत नोटिस दिए गए हैं। इनमें वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दिल्ली के उपराज्यपाल, राज्यसभा सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक और पूर्व नौसेना प्रमुख को भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
बंगाल में मतदाता सूची पर उठाया सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल का हवाला देते हुए कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और जिन्हें मतदान से वंचित किया गया, उनमें अब तक जिन मामलों पर फैसला हुआ है, उनमें 93 प्रतिशत लोगों ने अपनी अपील जीत ली। खड़गे के अनुसार, इसके बाद 1,13,943 लोगों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर इन लोगों का मताधिकार छीना गया।
‘वीआईपी मतदाता’ पर भी सवाल
खड़गे ने चुनाव आयोग की उस आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर भी सवाल उठाया, जिसमें ‘वीआईपी चिह्नित मतदाता’ का उल्लेख किया गया। उन्होंने पूछा कि क्या अब सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के तहत मतदाताओं की कोई विशेष श्रेणी होगी। उन्होंने ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के संवैधानिक सिद्धांत का हवाला देते हुए पूछा कि क्या वीआईपी वोट को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
13.8 करोड़ मतदाताओं का दावा
खड़गे ने कहा कि एसआईआर के पहले तीन चरणों में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। उन्होंने इसे 94.78 करोड़ मतदाताओं का करीब 14.61 प्रतिशत बताया। खड़गे ने आरोप लगाया कि वीआईपी मतदाताओं के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा रही है, जबकि करोड़ों आम मतदाताओं के मामले में खामोशी है।
खड़गे के बयान के बाद एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
