शुक्रवार, 15 मई 202612:44:17 PM
Download App
Home/देश

टैलेंट हंट या भरोसे का संकट? : कांग्रेस में ‘अपनों’ से ही डर की राजनीति, मीडिया टीम की बैठक ने उजागर की अंदरूनी खींचतान

admin

admin

May 15, 2026
11:06 AM
कांग्रेस में ‘अपनों’ से ही डर की राजनीति, मीडिया टीम की बैठक ने उजागर की अंदरूनी खींचतान

भोपाल। मप्र कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। राजधानी भोपाल में आयोजित कांग्रेस के “टैलेंट हंट” कार्यक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही गहरी असहजता को सामने ला दिया है। मंच प्रतिभाओं को तलाशने का था, लेकिन चर्चा ज्यादा “मुखबिरी”, गुटबाजी और अंदरूनी अविश्वास पर केंद्रित रही। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक के बयान ने साफ कर दिया कि पार्टी सिर्फ विपक्ष से नहीं, बल्कि अपने ही लोगों से परेशान है।

मुकेश नायक ने कहा कि कुछ लोग पार्टी की अंदरूनी बातें बाहर पहुंचाकर संगठन को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर “सर्बोटेज” की राजनीति का आरोप लगाया, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि कांग्रेस को अपने ही कार्यकर्ताओं और नेताओं पर भरोसा नहीं रह गया, तो वह जनता का विश्वास कैसे जीतेगी?

‘टैलेंट हंट’ में प्रतिभा कम, सियासत ज्यादा

कांग्रेस ने इस आयोजन को नए चेहरों और प्रवक्ताओं की तलाश का अभियान बताया। दो दिनों में करीब 148 प्रतिभागियों ने इंटरव्यू दिए। लेकिन जिस तरह कार्यक्रम के दौरान “सावधान रहने” और “अंदर की खबर बाहर जाने” जैसी बातें सामने आईं, उससे यह आयोजन प्रतिभा खोज से ज्यादा संगठनात्मक असुरक्षा का प्रतीक बन गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस लंबे समय से नेतृत्व संघर्ष और खेमेबाजी से जूझ रही है। चुनावी हार के बाद आत्ममंथन की बजाय अब पार्टी में संदेह का माहौल बनता दिख रहा है। ऐसे में “टैलेंट हंट” जैसे कार्यक्रम भी सकारात्मक संदेश देने के बजाय अंदरूनी कमजोरी को उजागर कर रहे हैं।

जनता के मुद्दों से दूरी, अंदरूनी लड़ाई में उलझी कांग्रेस

प्रदेश में किसान, बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन कांग्रेस की चर्चा फिलहाल अपने ही लोगों पर नजर रखने तक सिमटती दिख रही है। भाजपा लगातार संगठन विस्तार और बूथ स्तर की मजबूती पर काम कर रही है, जबकि कांग्रेस अभी भी भरोसे और नेतृत्व के संकट से बाहर नहीं निकल पा रही।

यदि पार्टी को वास्तव में मजबूत बनना है तो उसे “मुखबिर खोजने” से ज्यादा “विश्वास बनाने” पर ध्यान देना होगा। क्योंकि जिस संगठन में कार्यकर्ता खुद को संदेह के घेरे में महसूस करे, वहां प्रतिभाएं टिकती नहीं, धीरे-धीरे दूर हो जाती हैं।

admin
Written By

admin

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें