फिल्म कैमरे से डिजिटल दौर तक पहुंचा बॉलीवुड : प्रीति जिंटा ने 28 साल के सफर को किया याद, कहा- एक चीज आज भी नहीं बदली

मुंबई। हिंदी सिनेमा ने पिछले तीन दशकों में तकनीक, कहानी और फिल्म निर्माण के स्तर पर लंबा सफर तय किया है। अभिनेत्री प्रीति जिंटा इस बदलाव की प्रत्यक्ष गवाह रही हैं। 90 के दशक के अंतिम वर्षों में फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाली प्रीति ने उस दौर से लेकर आज तक सिनेमा को कई रूप बदलते देखा है। उनके मुताबिक, शूटिंग की तकनीक और फिल्मों की कहानियां भले ही काफी बदल गई हों, लेकिन कलाकारों पर बेहतर प्रदर्शन देने का दबाव आज भी पहले जैसा ही है।
‘क्या कहना’ से शुरू हुआ अलग सफर
प्रीति जिंटा ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि वह खुद को भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें ऐसे समय में हिंदी फिल्मों में प्रवेश करने का अवसर मिला, जब सिनेमा बदलाव के दौर में प्रवेश कर रहा था। फिल्म ‘क्या कहना’ उनके लिए खास रही। उस समय के लिहाज से फिल्म की कहानी काफी अलग थी और नई अभिनेत्री के तौर पर उसमें काम करना उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव था। हालांकि, प्रीति के मुताबिक, उनके आने से पहले भी हिंदी सिनेमा में ऐसी विषयवस्तु पर फिल्में बन चुकी थीं।
‘दिल चाहता है’ ने बदली फिल्म बनाने की शैली
प्रीति ने कहा कि इसके बाद ‘दिल चाहता है’ जैसी फिल्मों ने फिल्म निर्माण के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव दिखाया। इसमें संवादों को सीधे शूटिंग के दौरान रिकॉर्ड करने की तकनीक का इस्तेमाल हुआ, जिससे कलाकारों को बाद में आवाज रिकॉर्ड करने की जरूरत कम हुई। उनके अनुसार, वह खुद उस संक्रमणकाल का हिस्सा थीं, जब हिंदी फिल्मों में पुरानी कार्यशैली धीरे-धीरे आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रही थी।
फिल्म कैमरे से डिजिटल तकनीक तक
अभिनेत्री ने बताया कि उनके करियर की शुरुआत में फिल्मों की शूटिंग पारंपरिक फिल्म कैमरों से होती थी। आज डिजिटल कैमरों ने लगभग पूरी तरह उनकी जगह ले ली है। डिजिटल तकनीक ने फिल्म निर्माताओं को शूटिंग के बाद दृश्यों में सुधार और बदलाव के कई विकल्प भी उपलब्ध कराए हैं। प्रीति के मुताबिक, तकनीकी सुविधाओं ने फिल्म निर्माण को काफी बदल दिया है, लेकिन कलाकार की जिम्मेदारी कम नहीं हुई।
कहानियों में भी आया बड़ा बदलाव
उन्होंने बताया कि उनके शुरुआती दौर में विदेशों में रहने वाले भारतीयों और उनके परिवारों की कहानियां फिल्मों में खूब दिखाई जाती थीं। भारतीय परिवार, विदेश की पृष्ठभूमि और प्रेम संबंध उस समय की कई फिल्मों का अहम हिस्सा थे।
अब सिनेमा का रुझान भारत से जुड़ी कहानियों की ओर बढ़ा है। भारतीय पहचान, देश का इतिहास, सेना और राष्ट्र से जुड़े विषयों पर फिल्में बन रही हैं। इसी तरह हास्य फिल्मों का अंदाज भी समय के साथ बदला है। प्रीति का मानना है कि माध्यम और तकनीक चाहे कितनी बदल जाएं, कलाकार से बेहतरीन काम की उम्मीद हमेशा बनी रहती है। यही दबाव उनके अनुसार सिनेमा की दुनिया की वह कड़ी है, जो तीन दशक बाद भी नहीं बदली।
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