पंप स्टोरेज परियोजनाओं से चमकेगा छत्तीसगढ़ : बस्तर से जशपुर तक 13 हजार MHV क्षमता विकसित करने की तैयारी, जलाशयों से बनेगी ऊर्जा की नई ताकत

छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने पंप स्टोरेज तकनीक पर फोकस बढ़ा दिया है। इस तकनीक में पानी को ऊपरी और निचले जलाशयों के बीच प्रवाहित कर बिजली तैयार की जाती है। जरूरत के समय पानी छोड़ा जाता है और टरबाइन के जरिए बिजली उत्पादन होता है, जबकि कम खपत के समय पानी को फिर ऊपर स्टोर किया जाता है। इससे बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलती है।
बस्तर के 3 दिनों के 9 जलाशय तैयार
योजना के तहत प्रदेश के कई जलाशयों को चिन्हित कर प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया गया है। अब मानसून के दौरान जलस्तर और जल प्रवाह के आंकड़ों के आधार पर विस्तृत DPR तैयार की जाएगी। इस पूरी योजना में बस्तर संभाग को सबसे बड़ी प्राथमिकता मिली है। बस्तर के तीन जिलों में मौजूद 9 जलाशयों पर करीब 5700 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं विकसित करने की तैयारी चल रही है। इससे पहली बार बस्तर बड़े ऊर्जा हब के रूप में उभर सकता है।
जशपुर में 2 बड़े प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर को भी इस योजना में खास महत्व दिया गया है। यहां डांगरी और रौनी क्षेत्र में दो बड़े पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 3500 मेगावाट होगी। इसके अलावा कोरबा, गरियाबंद और बलरामपुर जिलों में भी बड़े संयंत्र लगाए जाएंगे, जिससे पूरे प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
(GFX IN)
कोरबा – हसदेव बांगो : 800 मेगावाट
गरियाबंद – सिकासेर बांध : 1200 मेगावाट
कुरुंड : 1000 मेगावाट
जशपुर – डांगरी : 1400 मेगावाट
जशपुर – रौनी : 2100 मेगावाट
बलरामपुर – कोटापाली : 1800 मेगावाट
राज्य में इस साल गर्मियों के दौरान बिजली की अधिकतम मांग करीब 7300 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। आने वाले वर्षों में इसके 8000 मेगावाट से ज्यादा होने का अनुमान है। ऐसे में सरकार इन परियोजनाओं को भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मान रही है। सरकार का दावा है कि सभी परियोजनाएं पूरी होने के बाद छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख जल-ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो जाएगा।
सिर्फ बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि इन परियोजनाओं से बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी इलाकों में रोजगार और विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे। निर्माण कार्य से लेकर तकनीकी सेवाओं तक हजारों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही सड़क, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार होगा। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ अब सिर्फ कोयला आधारित बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि जल आधारित आधुनिक ऊर्जा मॉडल के जरिए देश के ऊर्जा मानचित्र पर नई पहचान बनाने की तैयारी में है।
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
