शुक्रवार, 31 जुलाई 202612:11:07 AM
Download App
Home/देश

36 रन से गाबा विजय तक : रहाणे पीछे छोड़ गए भारतीय क्रिकेट की प्रेरणादायक कप्तान, ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत हमेशा रहेगी यादगार

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 30, 2026
08:54 AM
रहाणे पीछे छोड़ गए भारतीय क्रिकेट की प्रेरणादायक कप्तान, ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत हमेशा रहेगी यादगार

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद और शांत स्वभाव वाले बल्लेबाजों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। 38 वर्षीय रहाणे ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो और संदेश साझा करते हुए अपने संन्यास की घोषणा की। उनके इस फैसले के साथ भारतीय क्रिकेट का एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसने मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य, नेतृत्व और जज्बे की नई मिसाल कायम की। रहाणे ने अपने करियर में कई यादगार पारियां खेलीं, लेकिन 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी कप्तानी हमेशा भारतीय क्रिकेट इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज रहेगी।

36 रन की निराशा के बाद संभाली टीम की कमान

साल 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी भारत के लिए बेहद कठिन शुरुआत लेकर आई थी। एडिलेड टेस्ट की दूसरी पारी में भारतीय टीम केवल 36 रन पर सिमट गई, जो टेस्ट क्रिकेट में भारत का सबसे कम स्कोर है। इस झटके के बाद नियमित कप्तान विराट कोहली पैटरनिटी लीव पर स्वदेश लौट गए, जबकि रोहित शर्मा हैमस्ट्रिंग चोट के कारण शुरुआती दो टेस्ट से बाहर थे। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में टीम की कप्तानी उपकप्तान अजिंक्य रहाणे के हाथों में आई।

रहाणे ने सबसे पहले ड्रेसिंग रूम का माहौल बदला। उन्होंने खिलाड़ियों से साफ कहा कि 36 रन की चर्चा अब पीछे छोड़नी होगी और पूरी ऊर्जा अगले मुकाबले पर लगानी होगी। उनका मानना था कि अतीत को भूलकर ही नई शुरुआत की जा सकती है।

मेलबर्न से शुरू हुई ऐतिहासिक वापसी

रहाणे की कप्तानी में भारत ने मेलबर्न बॉक्सिंग डे टेस्ट में शानदार वापसी की। उन्होंने खुद 112 रन की शानदार कप्तानी पारी खेली और भारत ने मैच जीतकर सीरीज 1-1 से बराबर कर दी। इसके बाद सिडनी टेस्ट में टीम इंडिया ने अद्भुत संघर्ष दिखाया। चेतेश्वर पुजारा ने लंबी पारी खेली, जबकि चोटिल पीठ के बावजूद रविचंद्रन अश्विन ने 128 गेंदों पर नाबाद 39 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

सीरीज का निर्णायक मुकाबला ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर खेला गया, जहां ऑस्ट्रेलिया 32 वर्षों से कोई टेस्ट नहीं हारा था। भारत ने 328 रन का कठिन लक्ष्य तीन विकेट शेष रहते हासिल कर इतिहास रच दिया और 2-1 से सीरीज अपने नाम कर ली। यह जीत भारतीय क्रिकेट की सबसे महान टेस्ट जीतों में गिनी जाती है।

रोहित, पुजारा और अश्विन बने सबसे बड़े सहयोगी

रहाणे ने कई बार स्वीकार किया कि कप्तानी के दौरान उन्हें सबसे अधिक सहयोग रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा और रविचंद्रन अश्विन से मिला। शुरुआती दो टेस्ट से बाहर रहने के बाद जब रोहित टीम में लौटे तो उन्होंने नेतृत्व की जिम्मेदारियां भी साझा कीं। रहाणे के अनुसार यदि वह किसी खिलाड़ी तक सीधे नहीं पहुंच पाते थे तो रोहित उनसे बात कर माहौल सहज बना देते थे।

उन्होंने पुजारा पर भी पूरा भरोसा जताया। जब उनकी धीमी बल्लेबाजी की आलोचना हो रही थी, तब रहाणे ने उन्हें अपने स्वाभाविक खेल पर कायम रहने की सलाह दी। पुजारा ने पूरी सीरीज में 928 गेंदों का सामना कर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को थका दिया और भारत की ऐतिहासिक जीत की मजबूत नींव रखी।

अश्विन और युवा खिलाड़ियों में भरा आत्मविश्वास

ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान रविचंद्रन अश्विन बल्लेबाजी को लेकर आत्मविश्वास खो रहे थे। रहाणे ने उन्हें बल्लेबाजी की चिंता छोड़ गेंदबाजी पर ध्यान देने की सलाह दी। इसका असर उनके प्रदर्शन में साफ दिखाई दिया। बाद में अश्विन ने सिडनी टेस्ट में दर्द से जूझते हुए लंबी पारी खेलकर भारत को हार से बचाया।

दूसरी ओर, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह, रवींद्र जडेजा और हनुमा विहारी जैसे कई अनुभवी खिलाड़ियों के चोटिल होने के बाद रहाणे ने युवा खिलाड़ियों को खुलकर खेलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा अवसर उन्हें शायद ही दोबारा मिले। बिना दबाव के खेलने की इस सोच ने युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर कड़ी चुनौती दी।

कप्तान के रूप में कभी नहीं हारे टेस्ट

अजिंक्य रहाणे का कप्तानी रिकॉर्ड भी बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने भारत के लिए छह टेस्ट मैचों में कप्तानी की, जिनमें चार में जीत मिली और दो मुकाबले ड्रॉ रहे। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम एक भी टेस्ट नहीं हारी। सीमित संसाधनों, कई चोटों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीतना उनकी कप्तानी की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

रहाणे के संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट एक ऐसे खिलाड़ी को विदाई दे रहा है जिसने अपने शांत स्वभाव, टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता और दबाव में शानदार नेतृत्व से करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी गाबा विजय और 2020-21 की ऐतिहासिक सीरीज आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

प्रफुल्ल तिवारी
Written By

प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें