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जबलपुर में मजबूत होगी सेना की ‘लोहे की दीवार’ : रक्षा मंत्री ने नई परियोजना की रखी नींव, टी-72 और टी-90 टैंकों को मिलेगा नया जीवन

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 27, 2026
10:34 AM
रक्षा मंत्री ने नई परियोजना की रखी नींव,  टी-72 और टी-90 टैंकों को मिलेगा नया जीवन

जबलपुर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जबलपुर में टैंकों के नवीनीकरण की नई परियोजना का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय सेना दुनिया की शक्तिशाली सेनाओं में शामिल है और उसकी जरूरतों को देखते हुए आधुनिक युद्ध के साथ-साथ टैंकों का महत्व भी बना हुआ है। उन्होंने टी-72 और टी-90 टैंकों को भारतीय सीमाओं की ‘लोहे की दीवार’ बताते हुए कहा कि युद्ध का स्वरूप और तकनीक भले बदल रही हो, लेकिन जमीनी लड़ाई में टैंकों की भूमिका खत्म नहीं हुई है।

हर साल 80 टैंकों को मिलेगा नया जीवन

राजनाथ सिंह ने बताया कि जबलपुर में स्थापित होने वाली इस परियोजना से हर साल 80 अतिरिक्त टैंकों के नवीनीकरण की क्षमता विकसित होगी। परियोजना पर करीब 472 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजना पूरी होने के बाद भारी वाहन कारखाना अवाडी की 150 और जबलपुर की 80 टैंकों की क्षमता को मिलाकर हर वर्ष कुल 230 टैंकों का नवीनीकरण किया जा सकेगा। इससे सेना को जरूरत के मुताबिक समय पर आधुनिक और तैयार टैंक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

10 साल में रक्षा उत्पादन में बड़ी छलांग

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।इसी तरह रक्षा निर्यात भी 2014 के एक हजार करोड़ रुपये से कम के स्तर से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत को अब विनिर्माण शक्ति और भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में देख रही है।

टैंक के साथ ड्रोन और मिसाइल भी जरूरी

राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में किसी एक हथियार को दूसरे का विकल्प मानना सही नहीं है। सेना को टैंक, ड्रोन, मिसाइल, तोपखाना, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और ऊर्जा आधारित हथियारों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह होना चाहिए कि सैनिकों के पास आधुनिक टैंक और ड्रोन दोनों हों तथा उनके बीच बेहतर तालमेल हो। जबलपुर की नई सुविधा इसी सोच को आगे बढ़ाएगी।

युवाओं और स्थानीय उद्योग को मिलेगा अवसर

रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले चार दशकों में भारी वाहन कारखाने ने भारतीय सेना को करीब 4,400 टैंक उपलब्ध कराए हैं। नई परियोजना से स्थानीय प्रतिभाओं, तकनीकी कर्मचारियों, युवाओं और छोटे उद्यमियों के लिए रोजगार तथा कारोबार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 3,073 हेक्टेयर भूमि पर रक्षा विनिर्माण की संभावनाएं और 16,960 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावित निवेश मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख रक्षा एवं विमानन विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम हैं।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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