बुधवार, 17 जून 202605:15:55 PM
Download App
Home/देश

मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर सियासी बवाल : सिंघार ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, जानें क्या है पूरा मामला

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 17, 2026
09:26 AM
सिंघार ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, जानें क्या है पूरा मामला

भोपाल। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार द्वारा रीवा, गुना और देवास जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित करने के फैसले पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के इस फैसले के तहत इन 18 सीएचसी का संचालन निजी कंपनियों के माध्यम से किया जाएगा। इन कंपनियों को डॉक्टरों की नियुक्ति से लेकर मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन तक की जिम्मेदारी दी जाएगी। सरकार का दावा है कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

सिंघार ने सरकार पर लगाए यह भी आरोप

वहीं, उमंग सिंघार ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पहले सरकारी अस्पतालों को कमजोर करती है, फिर डॉक्टरों की भर्ती में लापरवाही बरतती है और अंत में निजीकरण को ही समाधान के रूप में पेश करती है। उन्होंने इसे “स्वास्थ्य सेवाओं को ठेके पर देने की नीति” बताया।

यह केवल सीएचसी तक नहीं रहेगा सीमित

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि यह केवल 18 सीएचसी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो इसे प्रदेश के 277 सीएचसी तक विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण, आदिवासी और गरीब वर्ग पूरी तरह सरकारी अस्पतालों पर निर्भर है, लेकिन सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिकार की बजाय व्यापार में बदल रही है।

संसाधनों का विस्तार कर तय की जाए जवाबदेवी

सिंघार ने मुख्यमंत्री से मांग की कि स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण रोककर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भर्ती बढ़ाई जाए, संसाधनों का विस्तार किया जाए और जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि जनता इलाज चाहती है, “ठेका व्यवस्था” नहीं। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में विधानसभा में और भी तीखी बहस होने की संभावना है।

प्रफुल्ल तिवारी
Written By

प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें