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पेट्रोल में कितना इथेनॉल मिला है : ई-20 पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने दी सलाह

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 31, 2026
08:25 AM
ई-20 पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने दी सलाह

नई दिल्ली। ई-20 पेट्रोल को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिका में पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की मात्रा को लेकर उपभोक्ताओं के लिए अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत के लिए संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करने की छूट दी।

अधिवक्ता नरेंद्र गोस्वामी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि ग्राहकों को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि वे जो पेट्रोल खरीद रहे हैं, उसमें कितनी मात्रा में इथेनॉल मिला हुआ है। याचिका में पेट्रोल पंपों पर सूचना प्रदर्शित करने से लेकर बिल और रसीद में भी इथेनॉल की मात्रा दर्ज करने की मांग की गई थी।

हर नोजल पर लिखी जाए इथेनॉल की मात्रा

याचिका में मांग की गई थी कि प्रत्येक पेट्रोल पंप के हर नोजल पर स्पष्ट रूप से बताया जाए कि संबंधित पेट्रोल में कितने प्रतिशत इथेनॉल मिला है। इसके अलावा ग्राहक को दिए जाने वाले बिल या रसीद पर भी इथेनॉल की मात्रा दर्ज करने का प्रावधान करने की मांग की गई। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इससे वाहन मालिकों को यह तय करने में मदद मिलेगी कि उनके वाहन के लिए कौन-सा ईंधन उपयुक्त है।

वाहनों की मॉडलवार जानकारी उपलब्ध कराने की मांग

याचिका में केंद्र सरकार से एक आधिकारिक वाहन-वार सूची या आंकड़ा तैयार करने की मांग भी की गई थी। इसमें कंपनी, वाहन का मॉडल और निर्माण वर्ष के आधार पर यह जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही गई थी कि कौन-सा वाहन ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल के लिए अनुकूल है और कौन-सा नहीं। पुराने वाहनों के संबंध में याचिका में ऐसी चरणबद्ध व्यवस्था बनाने की मांग की गई थी, जिसके तहत ई-20 के लिए अनुकूल नहीं होने वाले वाहनों को कम इथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराया जा सके।

‘नीति को चुनौती नहीं, जानकारी का अधिकार चाहिए’

याचिकाकर्ता नरेंद्र गोस्वामी ने अदालत में कहा कि वह केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति को चुनौती नहीं दे रहे हैं। उनका कहना था कि उनकी मांग केवल इतनी है कि उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खरीदे जा रहे पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा की स्पष्ट जानकारी मिले। उन्होंने कहा कि जैसे किसी खाद्य पदार्थ के पैकेट पर उसमें मौजूद सामग्री की जानकारी दी जाती है, उसी तरह ईंधन खरीदने वाले व्यक्ति को भी यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि वह क्या खरीद रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाई कोर्ट जाएं

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अपनी शिकायत लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर सकते हैं। इस फैसले के बाद ई-20 पेट्रोल में पारदर्शिता और वाहन अनुकूलता से जुड़ा मुद्दा अब उच्च न्यायालय के समक्ष उठाए जाने का रास्ता खुला है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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