‘निपुण’ नौसेना में शामिल, : समुद्र की गहराइयों में भारत की नई ताकत! अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस पोत संकटग्रस्त पनडुब्बियों को बचाने में बनेगा कवच

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को सोमवार को बड़ी मजबूती मिली, जब स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट पोत ‘निपुण’ को नौसैनिक बेड़े में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की मौजूदगी में मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में हुए समारोह के दौरान इस पोत को बेड़े का हिस्सा बनाया गया। करीब 9,000 टन वजनी ‘निपुण’ को खास तौर पर गहरे समुद्र में गोताखोरी, पानी के नीचे बचाव और जटिल समुद्री अभियानों के लिए तैयार किया गया है।
गहराई में छिपे खतरों से निपटने की नई क्षमता
सामान्य पोत जहां मुख्य रूप से समुद्र की सतह पर संचालन करते हैं, वहीं ‘निपुण’ को समुद्र की गहराइयों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आधुनिक गोताखोरी प्रणालियां मौजूद हैं, जो चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों में गोताखोरों को लंबे समय तक सहायता उपलब्ध करा सकती हैं।
पानी के नीचे किसी संदिग्ध वस्तु की जांच, मलबा हटाने, बचाव अभियान या अन्य जटिल गतिविधियों में यह पोत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसमें गोताखोरी, पानी के नीचे हस्तक्षेप और चिकित्सकीय सहायता के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
मुसीबत में फंसी पनडुब्बी के लिए बनेगा सहारा
‘निपुण’ की सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में से एक इसकी पनडुब्बी बचाव क्षमता को मजबूत करना है। समुद्र की गहराई में किसी पनडुब्बी के संकट में फंसने की स्थिति में राहत अभियान बेहद कठिन और समय-संवेदी होता है। ऐसे अभियानों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि युद्धक तैयारी नौसेना की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पनडुब्बी बचाव अभियानों में देरी की बहुत कम गुंजाइश होती है और ‘निपुण’ भारत की संकटग्रस्त पनडुब्बियों की सहायता करने की क्षमता को काफी बढ़ाएगा।
दोस्त देशों की भी कर सकेगा मदद
नौसेना प्रमुख के मुताबिक ‘निपुण’ की विशेष गोताखोरी क्षमताओं का इस्तेमाल मित्र देशों के साथ पानी के भीतर मलबा हटाने और बचाव अभियानों में सहयोग के लिए भी किया जा सकता है। पश्चिमी नौसेना कमान अब इसे अपनी परिचालन योजनाओं में शामिल करने, व्यापक अभ्यास कराने और इसकी विशेष प्रणालियों में दक्षता बढ़ाने पर ध्यान देगी।
पूरी तरह स्वदेशी निर्माण, आत्मनिर्भर भारत की बड़ी मिसाल
‘निपुण’ निस्तार श्रेणी का दूसरा डाइविंग सपोर्ट पोत है। इसमें आधुनिक नौवहन और पोत प्रबंधन प्रणालियां लगाई गई हैं। इसकी सटीक स्थिति बनाए रखने की क्षमता पानी के नीचे होने वाले जटिल अभियानों के दौरान बेहद उपयोगी होगी।
इस पोत का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ है। इसे विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने तैयार किया है। ऐसे में ‘निपुण’ न केवल नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाता है, बल्कि देश की स्वदेशी रक्षा जहाज निर्माण क्षमता का भी मजबूत प्रदर्शन है।
समुद्री सुरक्षा को मिलेगा नया कवच
‘निपुण’ के पोत-चिह्न में व्हेल और आधुनिक गोताखोरी हेलमेट को दर्शाया गया है। व्हेल समुद्र की गहराई और लंबे समय तक पानी के भीतर रहने का प्रतीक है, जबकि गोताखोरी हेलमेट इसके मुख्य अभियान को दर्शाता है। इसके नौसेना में शामिल होने से भारत की गहरे समुद्र में गोताखोरी, पानी के नीचे हस्तक्षेप और पनडुब्बी बचाव की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी। समुद्री क्षेत्र में लगातार बदलती चुनौतियों के बीच ‘निपुण’ भारतीय नौसेना के लिए गहराई तक पहुंचने वाला एक नया सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
