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सिर पर मुकुट, गले में रुंडमाला : बाबा महाकाल के दिव्य श्रृंगार ने मस्मारती में भक्तों का मोहा मन, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा परिसर

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 20, 2026
07:33 AM
बाबा महाकाल के दिव्य श्रृंगार ने मस्मारती में भक्तों का मोहा मन, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा परिसर

उज्जैन। श्रावण मास की पावन बेला में गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रावण शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर तड़के 3 बजे बाबा महाकाल के पट खुले और विधि-विधान के साथ भस्म आरती संपन्न हुई। इस दौरान भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक कर विशेष शृंगार किया गया। बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पूरा परिसर जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा।

पंचामृत से हुआ महाकाल का अभिषेक

मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, भस्म आरती के लिए निर्धारित समय पर मंदिर के कपाट खोले गए। गर्भगृह में विराजमान भगवान की प्रतिमाओं का पूजन करने के बाद बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत अर्पित कर भगवान का अभिषेक किया गया।

विधिवत पूजन के बाद प्रथम घंटाल बजाया गया और हरि ओम का जल अर्पित किया गया। धार्मिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच गर्भगृह का वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया।

भांग के शृंगार ने मोहा भक्तों का मन

गुरुवार के शृंगार की सबसे खास बात बाबा महाकाल का भांग से किया गया अलौकिक शृंगार रहा। भगवान को बेलपत्र, त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजाया गया। इसके बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंडमाला धारण कराई गई।

शृंगार पूर्ण होने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के ज्योतिर्लिंग पर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद कपूर आरती और भोग अर्पण की विधि पूरी हुई।

भस्म आरती के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल हुए। भगवान के अलौकिक शृंगार के दर्शन होते ही भक्त भाव-विभोर नजर आए। मंदिर परिसर में लगातार जय श्री महाकाल और हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई देते रहे।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के बाद उनके निराकार स्वरूप के साकार दर्शन होते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती को देश की प्रमुख धार्मिक आरतियों में विशेष स्थान प्राप्त है।

दिनभर जारी रहेंगी पूजन की विशेष परंपराएं

महाकाल मंदिर में भस्म आरती के बाद दिनभर अलग-अलग आरतियों और पूजन की परंपरा जारी रहती है। दद्योदक आरती सुबह 7 बजे से 7ः45 बजे तक, भोग आरती सुबह 10 बजे से 10ः45 बजे तक होगी। संध्या पूजन शाम 5 बजे से 5ः45 बजे तक और संध्या आरती शाम 7 बजे से 7ः45 बजे तक होगी। दिन के अंतिम चरण में शयन आरती रात 10ः30 बजे से 11 बजे तक संपन्न होगी।

श्रावण मास में बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। ऐसे में गुरुवार की भस्म आरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर उज्जैन की शिवभक्ति और महाकाल की आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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