देश की बेटियों का अदम्य साहस : दुर्गम पराग ला दर्रा पर एनसीसी महिला कैडेटों ने गाड़ा झंडा, चुनौती भरी रही 18,300 फीट की ऊंचाई

नई दिल्ली। देश की बेटियों ने हिमालय की दुर्गम ऊंचाइयों पर अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए ‘अपराजिता-परांग ला 2026’ अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया। अभियान के दौरान एनसीसी की महिला कैडेटों ने समुद्र तल से 5,578 मीटर यानी करीब 18,300 फीट की ऊंचाई पर स्थित परांग ला दर्रे को पार किया। यह दर्रा हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है और देश के चुनौतीपूर्ण उच्च हिमालयी मार्गों में शामिल है।
30 दिन में तय किया 250 किलोमीटर का सफर
अभियान में देशभर से चुनी गई 28 एनसीसी महिला कैडेटों ने हिस्सा लिया। इनकी औसत उम्र करीब 19 वर्ष रही, जबकि सबसे कम उम्र की प्रतिभागी महज 16 वर्ष 6 महीने की थी। दल ने लगभग 250 किलोमीटर की दूरी 30 दिनों में पूरी की।
कैडेटों को रास्ते में ऊंचे पहाड़ों, ग्लेशियरों, बर्फीले मैदानों और नदी घाटियों जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अनुशासन, साहस और टीम भावना के साथ अभियान जारी रखा।
परांग ला रहा सबसे बड़ी चुनौती
अभियान की सबसे कठिन चुनौती 5,578 मीटर ऊंचा परांग ला दर्रा था। दल ने हिमाचल प्रदेश के किब्बर से यात्रा शुरू की और डुमला, थलटक, बोंगरोजेन होते हुए परांग ला दर्रे को पार किया। इसके बाद डाक करजोंग, नोरबू सुमदो, कियांगडोम और कोरजोक से गुजरते हुए अभियान दल लद्दाख के करजोक पहुंचा।
अभियान का नेतृत्व थल सेना, नौसेना और वायु सेना की तीन महिला अधिकारियों ने किया। उनके साथ अधिकारी, प्रशिक्षक, चिकित्सा दल और अन्य सहायता कर्मी भी मौजूद रहे।
16 सितंबर को करजोक में हुआ समापन
अभियान का समापन 16 सितंबर को लद्दाख के करजोक में हुआ। यहां राष्ट्रीय कैडेट कोर के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वात्स और रक्षा मंत्रालय की अपर सचिव दीप्ति मोहिल चावला ने अभियान दल का स्वागत किया। उन्होंने कैडेटों और अभियान से जुड़े सभी सदस्यों को सफल अभियान के लिए बधाई दी।
राजनाथ सिंह ने किया था रवाना
‘अपराजिता-परांग ला 2026’ अभियान को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 अगस्त को नई दिल्ली से रवाना किया था। इसका उद्देश्य युवा महिलाओं को साहसिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना और कठिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम करने का अनुभव देना था।
एनसीसी महानिदेशक ने कहा कि ऐसे अभियान युवाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, टीम भावना और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य विकसित करने में मदद करते हैं। अलग-अलग राज्यों से आई कैडेटों ने एक साथ चुनौतियों का सामना कर राष्ट्रीय एकता और आपसी सहयोग की भावना को भी मजबूत किया।
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