खत्म हुआ समझौता : ईरान पर ट्रंप के ऐलान से दुनिया में खलबली, तेहरान पर समय बर्बाद करने का लगाया आरोप

अंकारा। पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव के संकेत तेज हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें लगता है कि तेहरान के साथ हुआ एमओयू अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उसके साथ बातचीत समय की बर्बादी है।
इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने अपने बयान में यहां तक कह दिया कि ईरानी बीमार लोग हैं। मैं उनसे कोई डील नहीं करना चाहता। ईरान के साथ किसी नए समझौते की उनकी कोई ख्वाहिश नहीं है. मेरा मानना है कि यह मुद्दा अब खत्म हो चुका है। बता दें कि कुछ सप्ताह पहले तक बातचीत और कूटनीतिक समाधान की बात करने वाले ट्रंप के बदले हुए तेवरों ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है।
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, उनमें कुछ गड़बड़ है। वे बीमार हैं और गंदा खेल खेलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने वार्ताकारों को बातचीत जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि ईरान केवल समय बर्बाद कर रहा है और किसी गंभीर समाधान की दिशा में आगे नहीं बढ़ना चाहता।
सेंटकॉम-आईआरजीसी टकराव ने बढ़ाई युद्ध की आशंका
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) और ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंच चुका है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान के 80 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि जवाब में आईआरजीसी ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के 85 सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करने का दावा किया है।
दोनों देशों के दावों ने पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंका को और गहरा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सैन्य टकराव आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ेगा।
यूएई ने भी ईरान को घेरा, कहा- तनाव खत्म करने में नाकाम
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी ईरान की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गश ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में कतर और सऊदी अरब के वाणिज्यिक टैंकरों पर कथित हमले तथा बहरीन और कुवैत के खिलाफ लगातार आक्रामक रवैया यह साबित करता है कि ईरान तनाव कम करने और युद्ध समाप्त करने की दिशा में कोई गंभीर प्रयास नहीं कर रहा है।
गर्गश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि खाड़ी के अरब देश ईरान की बदलती रणनीति और बढ़ते तनाव का निशाना नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि क्षेत्र को युद्ध नहीं, बल्कि समझदारी, स्थिरता और शांति की आवश्यकता है।
बहरीन स्थित अमेरिकी एयर बेस पर ड्रोन हमले का दावा
तनाव के बीच ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी बलों को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। ईरान ने चेतावनी दी कि अमेरिका यदि युद्धविराम का उल्लंघन जारी रखता है तो क्षेत्र में मौजूद उसके सभी सैन्य ठिकाने सैन्य ड्रोन हमलों के वैध लक्ष्य माने जाएंगे।
हालांकि इन सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन दोनों देशों की आक्रामक बयानबाजी और लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर बड़े संघर्ष के मुहाने पर ला खड़ा किया है। ऐसे में दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कूटनीति हालात संभाल पाती है या क्षेत्र एक और व्यापक युद्ध की ओर बढ़ता है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
