गाली पर लगाम : मप्र का अनोखा गांव बना देश के लिए प्रेरणा, फैसला न मानने पर चुकानी पड़ेगी बड़ी कीमत

बुरहानपुर। मध्यप्रदेश बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जो पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर के लिए प्रेरणा बन सकती है। यहां ग्राम पंचायत ने सर्वसम्मति से एक नियम लागू किया है-अब गांव में गाली-गलौज करने पर 500 रुपए का जुर्माना या एक घंटे की सामुदायिक सफाई करनी होगी। इस अनोखे फैसले के बाद बोरसर को “गाली मुक्त गांव” के रूप में पहचान मिल रही है।
गांव के हर कोने में इस नियम की जानकारी देने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। पंचायत ने सिर्फ नियम ही नहीं बनाया, बल्कि लोगों को इसके प्रति जागरूक भी किया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से शपथ ली है कि वे अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इस सामाजिक अभियान का असर साफ दिखाई देने लगा हैकृअब लोग बोलचाल में संयम बरत रहे हैं।
बच्चों की आदत सुधारने की पहल
उप सरपंच विनोद शिंदे के अनुसार, इस पहल की सबसे बड़ी वजह बच्चों की भाषा में बढ़ती गाली-गलौज थी। 12-13 साल के बच्चे बिना समझे अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे। कई बार समझाने के बावजूद असर नहीं हो रहा था। ऐसे में पंचायत ने सख्त लेकिन रचनात्मक कदम उठाया।
विवादों की जड़ पर प्रहार
गांव के युवक अश्विन पाटिल का मानना है कि अधिकतर झगड़ों की शुरुआत गाली से ही होती है। इसी सोच ने “गाली मुक्त गांव” का विचार जन्म दिया। अब इस नियम के लागू होने से न केवल भाषा सुधरी है, बल्कि आपसी विवाद भी कम हुए हैं। स्थानीय निवासी जयश्री बताती हैं कि पहले जहां हर गली में गाली सुनाई देती थी, वहीं अब माहौल काफी बदल गया है। लोग सजग हैं और बच्चों में भी अच्छा व्यवहार विकसित हो रहा है।
दूसरे गांवों के लिए प्रेरणा
बोरसर की यह पहल अब आसपास के गांवों में भी चर्चा का विषय बन गई है। कई लोग इसे अपनाने की सोच रहे हैं। यह उदाहरण दिखाता है कि छोटे-छोटे सामाजिक बदलाव मिलकर बड़े परिवर्तन ला सकते हैं। बोरसर ने साबित कर दिया है कि बदलाव कानून से नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प और जिम्मेदारी से आता है।
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