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विदेशी चंदे के कानून पर संसद में घमासान, : संशोधन विधेयक को सदन में मिली हरी झंडी, अब 31 सदस्यीय संयुक्त समिति करेगी निगरानी

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 12, 2026
10:50 AM
संशोधन विधेयक  को सदन में मिली हरी झंडी, अब 31 सदस्यीय संयुक्त समिति करेगी निगरानी

नई दिल्ली। विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को आखिरकार संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने पर सहमति बन गई। लोकसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने पारित कर दिया। अब इस विधेयक की विस्तृत जांच 31 सदस्यीय संयुक्त समिति करेगी। विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजे जाने से अब इसके प्रावधानों पर विस्तृत विचार-विमर्श का रास्ता साफ हो गया है। समिति के सदस्य विधेयक से जुड़े विभिन्न पक्षों और संभावित प्रभावों पर चर्चा कर सकेंगे।

समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। समिति को विधेयक के विभिन्न प्रावधानों का गहन अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपनी होगी। समिति की बैठक के लिए कम से कम एक-तिहाई सदस्यों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इस संयुक्त समिति को अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक संसद में सौंपनी होगी। इसके साथ ही लोकसभा, राज्यसभा से इस समिति में शामिल होने और अपने सदस्यों के नाम भेजने का अनुरोध करेगी।

पक्ष-विपक्ष के बीच हुई तीखी नोकझोंक

विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों में बदलाव को लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विधेयक को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार अल्पसंख्यक वर्ग और गैर-सरकारी संगठनों को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग की।

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कई दिनों से विपक्षी दल स्वयं इस विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजने की मांग कर रहे थे। अब जब सरकार ने उनकी मांग स्वीकार कर ली है, तो उन्हें आपत्ति नहीं करनी चाहिए। रिजिजू ने कहा कि विपक्षी सदस्यों को विधेयक के किसी प्रावधान पर आपत्ति है तो वे संयुक्त समिति के सामने अपनी बात विस्तार से रख सकते हैं। समिति में उन्हें पर्याप्त समय और अवसर मिलेगा।

सरकार बोली- किसी वर्ग को निशाना नहीं बनाया गया

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य किसी अल्पसंख्यक वर्ग को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और विदेशी धन के नियमन को ध्यान में रखते हुए नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं।

रिजिजू ने विपक्ष से कहा कि यदि विधेयक में कोई आपत्तिजनक प्रावधान है तो उसे संयुक्त समिति के समक्ष रखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे पर लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।

अखिलेश यादव ने भी किया विरोध

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस विधेयक के खिलाफ एकजुट है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि उसके द्वारा लाए गए कानूनों में अल्पसंख्यक वर्ग के हितों को लेकर कितनी संवेदनशीलता दिखाई गई है।

इस पर किरेन रिजिजू ने जवाब देते हुए कहा कि विधेयक में ऐसा एक भी प्रावधान नहीं है जो किसी अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ हो। उन्होंने कहा कि विदेशी धन के भारत में प्रवेश और उसके उपयोग को कानून के दायरे में रखना जरूरी है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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