इंदौर वंदे मातरम पर घिरी कांग्रेस : न बोलते बन रहा, न चुप रहते, भाजपा को मिला मौका

भोपाल। इंदौर नगर निगम के सम्मेलन में ‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक तूफान बन चुका है। कांग्रेस की दो महिला पार्षदों द्वारा वंदे मातरम नहीं गाए जाने और पार्टी जाए भाण में विवादित बयान देने के बाद कांग्रेस ने दूरी बना ली है। पार्टी यह कदम दोनों महिला पार्षदों के लिए परेशानी का सबब बनता दिख रहा है।
कांग्रेस की चुप्पी बनी नाराजगी की वजह
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी सबसे ज्यादा चर्चा में है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आने से पार्टी के भीतर ही असंतोष पनपने लगा है। खासतौर पर अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं ने इस पर नाराजगी जताई है। उनका मानना है कि पार्टी को अपने प्रतिनिधियों के साथ खड़ा होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य करने पर भी सवाल
विवाद बढ़ने के बाद शहर कांग्रेस ने अपने सभी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले ने भी पार्टी के भीतर बहस छेड़ दी है। कुछ नेताओं का कहना है कि देशभक्ति को किसी आदेश से नहीं जोड़ा जा सकता। यह एक भावना है, जिसे थोपना उचित नहीं है।
भाजपा ने साधा निशाना, सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता
दूसरी ओर भाजपा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं और कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। कई स्थानों पर पुतला दहन कर ‘वंदे मातरम्’ गाकर विरोध जताया गया। भाजपा इसे राष्ट्रवाद से जोड़कर कांग्रेस पर लगातार हमला कर रही है।
राजनीतिक दबाव में कांग्रेस बैकफुट पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट रुख न लेना कांग्रेस के लिए नुकसानदायक हो सकता है। भाजपा के आक्रामक रुख के सामने कांग्रेस रक्षात्मक नजर आ रही है। पार्टी के भीतर भी एकजुटता की कमी साफ दिखाई दे रही है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस इस विवाद पर आधिकारिक रूप से क्या रुख अपनाती है। क्या पार्टी अपनी रणनीति बदलेगी या चुप्पी बनाए रखेगीकृयह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल ‘वंदे मातरम्’ का यह विवाद मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुका है।
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