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पितृ पक्ष : कौवे को भोजन कराने की क्यों है परंपरा? : जानिए श्रीराम से जुड़ी पूरी पौराणिक कथा

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Sep 23, 2026
06:32 AM
जानिए श्रीराम से जुड़ी पूरी पौराणिक कथा

पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने वाला पितृ पक्ष इस वर्ष 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक चलने वाले इस पक्ष में लोग अपने पितरों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में इस दौरान कौवे को भोजन कराने की परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि कौवा श्राद्ध का भोजन ग्रहण कर ले तो पितर भी उसे स्वीकार करते हैं।

कौवे को क्यों माना जाता है पितरों का प्रतीक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों के लिए तैयार किए गए भोजन का एक हिस्सा कौवे, गाय, कुत्ते, चींटी और देवताओं के लिए निकाला जाता है। माना जाता है कि पितर इन जीवों के माध्यम से भोजन ग्रहण करते हैं। इनमें कौवे को विशेष स्थान प्राप्त है।

गरुड़ पुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में कौवे को यमराज का संदेशवाहक माना गया है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पूर्वज कौवे के रूप में पृथ्वी पर आते हैं और अपने परिवार की ओर से श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया भोजन स्वीकार करते हैं। इसी वजह से श्राद्ध कर्म में कौवे को भोजन कराना महत्वपूर्ण माना जाता है।

श्रीराम और कौवे से जुड़ी है पौराणिक कथा

कौवे को श्राद्ध भोजन अर्पित करने की परंपरा से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा भगवान श्रीराम और माता सीता से संबंधित है। कथा के अनुसार, एक बार भगवान इंद्र के पुत्र जयंत ने कौवे का रूप धारण किया और माता सीता के पैर में चोंच मार दी। इससे उनके पैर से रक्त निकल आया।

यह देखकर भगवान श्रीराम ने तिनके का बाण चलाया। बाण से बचने के लिए जयंत तीनों लोकों में सहायता मांगने पहुंचे, लेकिन किसी ने उन्हें शरण नहीं दी। आखिरकार वह भगवान श्रीराम के पास लौटे और क्षमा मांगी। भगवान श्रीराम ने उन्हें क्षमा करते हुए वरदान दिया कि पितृ पक्ष में कौवे को अर्पित किया गया भोजन पितरों तक पहुंचेगा। धार्मिक मान्यता में इसी कथा को कौवों को श्राद्ध भोजन कराने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

उड़द, चावल और गुड़ से तैयार होता है प्रसाद

श्राद्ध के दौरान कौवे को भोजन कराने की भी एक पारंपरिक विधि बताई गई है। इसके लिए उड़द की दाल, चावल और गुड़ से प्रसाद तैयार किया जाता है। श्राद्ध एवं तर्पण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद इसका एक हिस्सा कौवे के लिए अलग निकालकर निर्धारित स्थान पर रखा जाता है।

पितृ दोष से मुक्ति की भी मान्यता

धार्मिक मान्यताओं में कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धापूर्वक श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है। कौवे को भोजन कराने को भी पितरों को प्रसन्न करने वाला कर्म माना गया है। कुछ मान्यताओं में इसे कुंडली के पितृ दोष और कालसर्प दोष की शांति से भी जोड़ा जाता है। हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं, इनके प्रभाव को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना जाता।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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