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काॅमनवेल्थ गेम्स 2026 : हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में झंडू कुमार ने भारत के लिए जीता कांस्य पदक, पीएम मोदी ने की उपलब्धि की सराहना, संघर्षों से भरी रही जिंदगी

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 25, 2026
06:52 AM
हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में झंडू कुमार ने भारत के लिए जीता कांस्य पदक, पीएम मोदी ने की उपलब्धि की सराहना, संघर्षों से भरी रही जिंदगी

ग्लासगो। ग्लासगो में चल रहे 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में झंडू कुमार ने भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता है। झंडू कुमार के इस पदक के साथ ही भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदकों का खाता भी खुल गया। झंडू की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बधाई दी है।

पीएम ने एक्स पर पोस्ट करते हुए झंडू कुमार की सराहना करते हुए लिखा- कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने पर झंडू कुमार को बधाई। उनकी उपलब्धि अपार शक्ति, अटूट संकल्प और वर्षों की अनुशासित मेहनत का सशक्त प्रतीक है। हर चुनौती को पार कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और अनगिनत भारतीयों को प्रेरित किया है। बता दें कि पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार की सफलता संघर्ष, हौसले और मेहनत की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित करती है।

बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले 28 वर्षीय झंडू कुमार ने पुरुषों के हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग वर्ग में 190 किलोग्राम भार उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने न केवल भारत का पदक खाता खोला, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां कभी भी मजबूत इरादों को नहीं रोक सकतीं।

पोलियो ने शरीर को रोका, हौसले को नहीं

झंडू कुमार का बचपन संघर्षों से भरा रहा। महज पांच वर्ष की उम्र में पोलियो ने उनके शरीर को प्रभावित कर दिया, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और घर का खर्च हरनौत बाजार में सब्जी बेचकर चलता था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने खेल के प्रति अपना जुनून कभी नहीं छोड़ा।

कोविड-19 महामारी के दौरान ओवरब्रिज निर्माण की वजह से परिवार की सब्जी की दुकान बंद हो गई। आमदनी का प्रमुख साधन खत्म होने के बाद झंडू ने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली और ई-रिक्शा चलाकर घर का खर्च चलाना शुरू किया।

दिन में मेहनत, रात में अभ्यास

झंडू कुमार की दिनचर्या किसी तपस्या से कम नहीं थी। सुबह लगभग 20 किलोमीटर दूर बिहार शरीफ जाकर सब्जियां खरीदना, पूरे दिन बाजार में उन्हें बेचना और फिर शाम को सीधे अभ्यास के लिए जिम पहुंच जाना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी थी। दिनभर की थकान के बावजूद उन्होंने कभी अभ्यास से समझौता नहीं किया। उनका एक ही सपना थाकृभारत की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए पदक जीतना।

रोजाना 400 से 500 रुपये की कमाई में परिवार का खर्च चलाना ही मुश्किल था, जबकि एक खिलाड़ी के लिए जरूरी पोषण और प्रोटीन पर ही लगभग एक हजार रुपये खर्च हो जाते थे। इसके बावजूद उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया।

ई-रिक्शा बेचकर खेली राष्ट्रीय प्रतियोगिता

वर्ष 2023 में राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए झंडू कुमार ने अपना ई-रिक्शा तक बेच दिया। हालांकि उस प्रतियोगिता में वह एक भी सफल प्रयास नहीं कर सके। यह हार उनके लिए बड़ा झटका थी, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को और मजबूत बनाने का फैसला किया।

इसी प्रतियोगिता के दौरान भारत के पूर्व पैरा पावरलिफ्टर और राष्ट्रीय कोच राजिंदर सिंह राहेलू की नजर उनकी मेहनत और जज्बे पर पड़ी। उन्होंने झंडू को भारतीय खेल प्राधिकरण के गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण का अवसर दिलाया। यही उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण मिलने के बाद झंडू कुमार ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने खेलो इंडिया पैरा खेलों में रजत पदक जीता और फिर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई। एशिया-ओशिनिया ओपन पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में भी उन्होंने कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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