बामुलाहिजा : राज्यसभा का चुनावी पत्ता... भोपाल की सियासी खिचड़ी... और तबादले के साइड इफेक्ट्स।

- संदीप भम्मरकर
सियासत में कई बार हार की वजह जल्दबाजी भी होती है। राज्यसभा चुनाव की कहानी में अब कांग्रेस की रणनीति ही सवालों के घेरे में है। कांग्रेसी गलियारों में ही चर्चा है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन दाखिल होते ही बीजेपी को पूरा चुनावी गणित समझ आ गया। उधर कांग्रेस बाड़ेबंदी और सतर्कता में लगी रही, मगर डमी उम्मीदवार और आखिरी वक्त की चाल जैसे विकल्पों पर ध्यान नहीं गया। अब गलियारों में कानाफूसी है, कहीं जीत की रणनीति विरोधी ने नहीं, जल्द खुल गए पत्तों ने तो नहीं लिख दी?
दिल्ली में पकी, भोपाल में जली!
सियासत की सबसे स्वादिष्ट डिश अक्सर बंद कमरों में पकती है। राज्यसभा टिकट पर मीनाक्षी नटराजन का नाम तय होने से पहले कांग्रेस में अलग ही खिचड़ी चढ़ी हुई थी। चर्चा है कि एक दिग्गज दूसरे दिग्गज के नाम को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली दरबार तक जोर लगा रहे थे। मुलाकातों का दौर चला, गणित बिठाया गया और संदेश भी पहुंचाए गए। मगर आखिर में हुआ वही, जो शीर्ष नेतृत्व ने तय किया। अब गलियारों में तंज तैर रहा है, खिचड़ी खूब पकी, लेकिन परोसी किसी और के लिए... लेकिन चली गई बीजेपी की थाली में।
ट्रांसफर के लिए लोन
पोस्टिंग का सपना अब ईएमआई पर पूरा होने लगा है। तबादलों के मौसम में इस बार रेट ऐसे उड़ान भर रहे हैं कि जरूरतमंदों को पर्सनल लोन तक की जुगाड़ करनी पड़ रही है। स्कूली शिक्षा विभाग में ऑनलाइन प्रक्रिया चल रही है, लेकिन कुछ लोग सिंगल ट्रांसफर ऑर्डर लेकर भी घूमते दिख रहे हैं। गलियारों में चर्चा है कि ‘सेटिंग’ का पुराना फॉर्मूला अब भी आउटडेटेड नहीं हुआ। उधर बाकी विभागों में ट्रांसफर लिस्ट जारी होने के बाद रिलीविंग और जॉइनिंग लालफीताशाही के जाल में उलझी हैं। यहां भी सिस्टम जुगाड़ तलाश रहा है। कानाफूसी यही है कि तबादला कम, पूरा वित्तीय प्रोजेक्ट ज्यादा लग रहा है।
मैडम छुट्टी पर, महकमा बेचैन
एक छुट्टी… और पूरे विभाग की धड़कनें तेज। सामाजिक न्याय विभाग में पखवाड़े भर से सबसे बड़ी चर्चा किसी फाइल की नहीं, मैडम की छुट्टी की रही। ट्रांसफर सीजन शुरू होते ही जिम्मेदार पीएस मैडम लंबी छुट्टी पर चली गईं। मंत्रीजी का दफ्तर भी बेबस हो गया। मंत्रालय से लेकर मंत्री बंगले तक सवाल गूंजने लगा अब आदेश कौन करेगा? आखिरी दिन तक अफसर चक्कर काटते रहे। दिलचस्प यह कि पिछले साल भी लगभग यही कहानी दोहराई गई थी। आखिरकार हाईलेवल दखल के बाद प्रभार वाली मैडम ने मोर्चा संभाला। अब कानाफूसी है, ये महज संयोग है या छुट्टी का अपना टाइमटेबल?
सीएस की कुर्सी, दौड़ शुरू
कुर्सी अभी खाली नहीं हुई, लेकिन दावेदारों के कदम तेज़ हो गए हैं। प्रदेश के नए मुख्य सचिव को लेकर अफसरशाही में फिर हलचल बढ़ गई है। अनुराग जैन का कार्यकाल अगस्त अंत तक है और एक्सटेंशन मिलेगा या नहीं, यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। उधर संभावित दावेदारों ने भी अपने-अपने समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। दिलचस्प यह कि पिछले दौर में जिन नामों की चर्चा थी, वही चेहरे फिर रेस में बताए जा रहे हैं। इस लिस्ट के नाम तो सबको पता हैं… बस असरदार हाथ किस कंधे पर टिकेगा, यही रहस्य है।
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