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ई20 पर क्यों मचा है बवाल? : दुनिया के बड़े देश तो ई30, ई85 और ई100 तक पहुंच गए, जानिए भारत कहां खड़ा है

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 14, 2026
10:04 AM
दुनिया के बड़े देश तो ई30, ई85 और ई100 तक पहुंच गए, जानिए भारत कहां खड़ा है

नई दिल्ली। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई20) को लेकर भारत में लगातार बहस चल रही है। जहां एक ओर इसे लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं वैश्विक स्तर पर तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है। दुनिया के कई विकसित और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश वर्षों से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का उपयोग कर रहे हैं और कई राष्ट्र तो ई30, ई85 से लेकर ई100 तक के ईंधन मॉडल अपना चुके हैं। ऐसे में भारत का ई20 कार्यक्रम वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

कार्बन उत्सर्जन घटाने और तेल आयात कम करने पर दुनिया का जोर

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और ‘ग्लोबल बायोएथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसीज मैप’ के अनुसार, अधिकांश देश पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर कार्बन उत्सर्जन कम करने, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यही वजह है कि अलग-अलग देशों ने अपनी जरूरतों और संसाधनों के अनुसार एथेनॉल मिश्रण के अलग-अलग लक्ष्य तय किए हैं।

भारत ई20 तक पहुंचा, अब ई30 की तैयारी

भारत ने हाल ही में ई20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लक्ष्य को हासिल किया है। सरकार अब वर्ष 2030 तक ई30 लागू करने की दिशा में काम कर रही है। इससे साफ है कि भारत भी उन देशों की कतार में शामिल हो गया है, जो स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन को भविष्य का समाधान मान रहे हैं।

ब्राजील सबसे आगे, अमेरिका और यूरोप भी पीछे नहीं

एथेनॉल मिश्रण के मामले में ब्राजील दुनिया का अग्रणी देश माना जाता है। वहां ई30 के साथ-साथ ई100 यानी पूरी तरह एथेनॉल आधारित ईंधन का भी उपयोग किया जाता है। पैराग्वे ई30 और बोलीविया म्25 की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।

अमेरिका में ई10 और ई15 व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यूरोपीय संघ के अधिकांश सदस्य देशों में ई10 उपलब्ध है। ब्रिटेन ने भी ई10 लागू कर दिया है, जबकि फिनलैंड ने 2027 तक ई22.5 का लक्ष्य तय किया है। जापान भी 2030 तक ई10 और 2040 तक ई20 लागू करने की तैयारी कर रहा है।

एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में भी तेजी से बढ़ रहा उपयोग

भारत के अलावा नेपाल, थाईलैंड, वियतनाम और फिलीपींस जैसे एशियाई देशों ने भी एथेनॉल मिश्रण को अपनी ईंधन नीति का हिस्सा बनाया है। वहीं अफ्रीका के जिम्बाब्वे, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, अंगोला, मलावी और मोजाम्बिक सहित कई देश भी एथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा दे रहे हैं। लैटिन अमेरिका के अर्जेंटीना, उरुग्वे, कोलंबिया और इक्वाडोर जैसे देशों में भी अलग-अलग स्तर पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग किया जा रहा है।

वैश्विक बदलाव के साथ कदम मिला रहा भारत

दुनिया में बढ़ते पर्यावरणीय संकट और ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती को देखते हुए एथेनॉल मिश्रण अब केवल एक वैकल्पिक प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य की ईंधन रणनीति बनता जा रहा है। भारत भी ई20 के लक्ष्य को हासिल करने के बाद अब 2030 तक ई30 की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे न केवल कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में भी देश को मजबूती मिलेगी।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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