क्रिकेट दौरे की आड़ में नशीले पदार्थों की तस्करी? : पाकिस्तानी क्रिकेटरों को लेकर पूर्व गृह मंत्रालय अधिकारी सनसनीखेज खुलासा, आतंकवाद की फंडिंग से जुड़ा था नेटवर्क

नई दिल्ली। गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव आरवीएस मणि ने पाकिस्तान के दो पूर्व क्रिकेटरों को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया है कि शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ जब भी भारत आते थे तो साथ में नशीले पदार्थ लेकर आते थे। इतना ही नहीं, आरवीएस मणि ने एक साक्षात्कार के दौरान यह भी दावा किया की यह केवल व्यक्तिगत इस्तेमाल का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे आतंकवाद को आर्थिक मदद पहुंचाने का संगठित तंत्र था। इस मामले में उन्होंने आईएसआई का हाथ बताया है।
आरवीएस मणि ने दावा किया कि पाकिस्तान के कुछ चर्चित क्रिकेटरों ने तत्कालीन पाकिस्तानी उच्चायुक्त के सामने यह स्वीकार किया था कि वे भारत नशीले पदार्थ लेकर आए थे। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद संबंधित खिलाड़ियों को वापस भेज दिया गया था। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में काई सार्वजनिक दस्तावेज या आधिकारिक प्रूफ नहीं पेश किया।
केन्द्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारी रहे आरवीएस मणि
बता दें कि आरवीएस मणि केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारी रहे हैं। 2006-2010 के दौरान वे गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा डिवीजन में अंडर सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत थे। वे अब सेवानिवृत हो चुके हैं। आरवीएस मणि ने अगस्त 2013 में स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले ली थी। उस समय वे शहरी विकास मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी के पद पर थे। उनका काम जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और आतंकवाद से जुड़े संवेदनशील मुद्दों से संबंधित था।
‘आतंकवाद की आर्थिक मदद का बड़ा जरिया थी तस्करी’
आरवीएस मणि ने कहा कि गृह मंत्रालय में कार्यकाल के दौरान सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के अनुसार भारत में होने वाली आतंकवादी गतिविधियों की बड़ी हिस्सेदारी की आर्थिक पूर्ति नशीले पदार्थों की तस्करी से होती थी। उनके अनुसार, उस समय यह माना जाता था कि आतंकवाद को मिलने वाली धनराशि का एक बड़ा हिस्सा इसी अवैध कारोबार से आता था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की भूमिका भी रही।
पाकिस्तान के पूर्व कोच की मौत का भी किया जिक्र
पूर्व अधिकारी ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के तत्कालीन मुख्य कोच बॉब वूल्मर की वर्ष 2007 में हुई रहस्यमय मौत का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वूल्मर कथित तौर पर नशीले पदार्थों की तस्करी का विरोध कर रहे थे। हालांकि इस संबंध में उन्होंने कोई नया साक्ष्य पेश नहीं किया। उल्लेखनीय है कि बॉब वूल्मर की मौत विश्व कप के दौरान जमैका में हुई थी और उस मामले की जांच वर्षों तक चर्चा का विषय रही।
‘खुफिया एजेंसियां करती थीं सतर्क’
आरवीएस मणि ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर गृह मंत्रालय को संभावित गतिविधियों और खतरों के बारे में सूचनाएं देती थीं। उनके अनुसार, एजेंसियों का काम जानकारी उपलब्ध कराना होता है, जबकि आगे की कार्रवाई संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में अफीम की पैदावार और उससे जुड़े संकेतों पर भी सुरक्षा एजेंसियां नजर रखती थीं, क्योंकि उससे आतंकवादी गतिविधियों के बढ़ने की आशंका का आकलन किया जाता था।
पूर्व अधिकारी के इन दावों ने एक बार फिर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि इन आरोपों पर अब तक पाकिस्तान या संबंधित क्रिकेटरों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
