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जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में मजदूर की मौत : अंतिम संस्कार को लेकर परिजन नाराज, पार्थिव शरीर गांव लाने की मांग की थी, सक्ती के दीपक रात्रे को आतंकियों ने मारी गोली

नीलम अहिरवार

नीलम अहिरवार

Aug 02, 2026
11:59 AM
अंतिम संस्कार को लेकर परिजन नाराज, पार्थिव शरीर गांव लाने की मांग की थी, सक्ती के दीपक रात्रे को आतंकियों ने मारी गोली

सक्ती। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में शुक्रवार देर शाम हुए आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के एक मजदूर की गोली लगने से मौत हो गई। मृतक की पहचान सक्ती जिले के बुंदेली गांव निवासी दीपक रात्रे के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही दीपक के गृहग्राम में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

आतंकियों ने मजदूरों से पूछी पहचान, फिर की फायरिंग

जानकारी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में कुछ मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान आतंकियों ने वहां मौजूद मजदूरों से उनकी पहचान और नाम पूछा। इसके बाद आतंकियों ने अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में छत्तीसगढ़ के दीपक रात्रे की मौके पर ही मौत हो गई। दीपक सक्ती जिले के बुंदेली गांव का रहने वाला था और पिछले करीब एक साल से जम्मू-कश्मीर में रहकर मजदूरी कर रहा था। वह ईंट भट्ठे में काम करता था।

मामा के घर रहकर की पढ़ाई, वहीं हुई थी शादी

परिजनों के मुताबिक, दीपक रात्रे बचपन से ही अपने मामा के घर हरदीडीह, जैजैपुर में रहकर पढ़ाई-लिखाई करता था। उसकी शादी भी मामा के घर से ही हुई थी। करीब एक साल पहले दीपक अपनी पत्नी और भाई के साथ रोजी-रोटी की तलाश में जम्मू-कश्मीर गया था। वहां वह ईंट भट्ठे में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। लेकिन आतंकी हमले ने परिवार की खुशियां छीन लीं।

पुलिस ने घर पहुंचकर परिजनों को दी जानकारी

दीपक की मौत की सूचना मिलने के बाद सक्ती जिला प्रशासन और पुलिस सक्रिय हुई। देर रात घटना की जानकारी मिलने पर सक्ती पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस टीम मृतक के परिजनों के घर पहुंची और परिवार को घटना की जानकारी दी। जैसे ही दीपक की मौत की खबर बुंदेली गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश है।

पार्थिव शरीर गांव लाने की मांग, अंतिम संस्कार को लेकर परिजन नाराज

दीपक के परिजनों ने उसका पार्थिव शरीर गृहग्राम लाने की मांग की थी। हालांकि, परिजनों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में ही मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसको लेकर परिवार के लोगों ने नाराजगी जताई है।परिजनों का कहना है कि उनकी अनुमति के बिना अंतिम संस्कार किया गया। परिवार चाहता था कि दीपक का पार्थिव शरीर उनके गृहग्राम लाया जाए, ताकि वे अंतिम दर्शन कर सकें और अपने रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार कर सकें।

विधायक ने की सरकारी नौकरी देने की मांग

घटना के बाद चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामकुमार यादव भी मृतक के परिजनों से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और सरकार द्वारा घोषित मुआवजे को अपर्याप्त बताया। विधायक ने कहा कि दीपक के परिवार में एक दिव्यांग भाई भी है। ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसके दिव्यांग भाई को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए, ताकि परिवार का जीवन-यापन हो सके। उन्होंने सरकार से मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता के साथ ही दिव्यांग भाई के लिए रोजगार की व्यवस्था करने की मांग की।

आतंकी हमले के बाद परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

दीपक रात्रे अपने परिवार के लिए रोजी-रोटी कमाने जम्मू-कश्मीर गया था, लेकिन आतंकी हमले में उसकी जान चली गई। एक तरफ परिवार ने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया, वहीं दूसरी ओर पार्थिव शरीर को गृहग्राम नहीं ला पाने और अंतिम संस्कार को लेकर परिजनों में नाराजगी भी है। अब परिवार की मांग है कि सरकार सिर्फ मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी न करे, बल्कि परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस मदद भी करे।

नीलम अहिरवार
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नीलम अहिरवार

17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।

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