हर साल बारिश... हर साल वही संकट : छत्तीसगढ़ में बारिश बनी आफत: कहीं उफनती नदी ने रोका रास्ता, कहीं गांव बने टापू; पुल-सड़क के इंतजार में वनांचल

Chhattisgarh Rain News: छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बारिश ने वनांचल और ग्रामीण इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कहीं उफनती नदी ग्रामीणों का रास्ता रोक रही है, तो कहीं सड़कें कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। नारायणपुर के अबूझमाड़ में सोनपुर नदी पर पुल नहीं होने से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। गरियाबंद में बेलाट नाला उफान पर आने से करीब 36 गांवों का देवभोग मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। वहीं बलौदाबाजार में महानदी की बाढ़ ने एक गांव को चारों तरफ से पानी से घेर दिया है।
सोनपुर नदी पर पुल नहीं, जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे ग्रामीण
नारायणपुर के अबूझमाड़ इलाके में बारिश शुरू होते ही सोनपुर नदी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। नदी पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण आसपास के दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। राशन लेने, वनोपज बेचने, बाजार जाने या किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को इसी नदी को पार करना पड़ता है।
बारिश के दौरान सोनपुर नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ बहाव भी तेज हो जाता है। ऐसे में नदी पार करना ग्रामीणों के लिए बेहद जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में हर साल ऐसी ही स्थिति बनती है और डर के बावजूद उन्हें नदी पार करनी पड़ती है।
ग्रामीणों के मुताबिक इलाके में नक्सलवाद का प्रभाव पहले की तुलना में कम हुआ है, लेकिन सड़क, पुल और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्रशासन का कहना है कि सोनपुर नदी पर पुल का काम जल्द शुरू किया जाएगा। वहीं बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही के लिए बोट की व्यवस्था भी शुरू की गई है। ग्रामीणों की मांग है कि स्थायी पुल का निर्माण जल्द कराया जाए, ताकि बारिश के मौसम में गांवों का संपर्क न टूटे।
बलरामपुर में सड़क पर धान की रोपाई कर ग्रामीणों ने जताया विरोध
बारिश के बाद बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर जनपद पंचायत के चंद्रनगर गांव में सड़क की हालत बेहद खराब हो गई है। कीचड़ और गड्ढों से परेशान ग्रामीणों ने अनोखे तरीके से विरोध जताया। ग्रामीणों ने बदहाल सड़क को ही खेत बना दिया और कीचड़ से भरी सड़क पर धान की रोपाई कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर जगह-जगह कीचड़ और गड्ढे होने के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। बारिश बढ़ने के साथ स्थिति और खराब हो जाती है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में अनियमितता के आरोप भी लगाए हैं।
मामला सामने आने के बाद जनपद पंचायत के CEO ने जांच की बात कही है। शिकायत के बाद जांच टीम गठित कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गरियाबंद में बेलाट नाला उफान पर, 36 गांवों का संपर्क टूटा
गरियाबंद जिले में भी बारिश के कारण हालात चुनौतीपूर्ण हैं। बेलाट नाला उफान पर आने के बाद देवभोग मुख्यालय से करीब 36 गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है।
इन गांवों के लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए देवभोग पर निर्भरता है। ऐसे में संपर्क टूटने से ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ गई हैं। प्रशासन की टीम मौके पर तैनात है और लोगों से तेज बहाव के बीच नाला पार नहीं करने की अपील की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि बेलाट नाले पर पुल की मांग लंबे समय से की जा रही है। सरकारें बदलीं, टेंडर की प्रक्रिया भी हुई, लेकिन स्थायी पुल का इंतजार अब तक खत्म नहीं हुआ। ऐसे में हर मानसून में ग्रामीणों को इसी समस्या से जूझना पड़ता है।
बलौदाबाजार में महानदी की बाढ़, गांव बना टापू
बलौदाबाजार जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच महानदी का जलस्तर बढ़ने से रीवासरार गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया। सड़क संपर्क टूटने के बाद पूरा गांव टापू में तब्दील हो गया है। महानदी के किनारे बसे इस गांव में करीब 40 परिवारों पर बाढ़ का संकट मंडरा रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव हर साल बारिश के दौरान बाढ़ की चुनौती का सामना करता है। फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
सक्ती में तेज बहाव में बह गए दो बाइक सवार, स्थानीय लोगों ने बचाया
सक्ती जिले में भी लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। परलकोट जलाशय का जलस्तर बढ़ने के साथ कई पुल-पुलियाओं के ऊपर से पानी बह रहा है।कपसी क्षेत्र के बूथवार में तेज बहाव के बीच पुलिया पार करना दो बाइक सवारों के लिए भारी पड़ गया। पानी के तेज बहाव में दोनों बाइक सवार बह गए। हालांकि मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने साहस और सूझबूझ दिखाते हुए दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और उफनते नदी-नालों व पुल-पुलियाओं को पार नहीं करने की अपील की है।
हर मानसून में वही तस्वीर, कब मिलेगा स्थायी समाधान?
छत्तीसगढ़ में बारिश किसानों के लिए राहत और उम्मीद लेकर आती है, लेकिन वनांचल और ग्रामीण इलाकों में यही बारिश कई परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन जाती है। कहीं पुल नहीं होने से नदी रास्ता रोक देती है, कहीं सड़कें कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं और कहीं गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है।नारायणपुर, गरियाबंद, बलौदाबाजार, बलरामपुर और सक्ती की तस्वीरें एक ही सवाल खड़ा करती हैं—हर साल मानसून के दौरान सामने आने वाली इन समस्याओं का स्थायी समाधान आखिर कब होगा?
बारिश के दौरान प्रशासन की ओर से लोगों को सावधानी बरतने की अपील की जाती है, राहत और बचाव के इंतजाम भी किए जाते हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थायी पुल, बेहतर सड़क और सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
क्योंकि हर साल बारिश आती है... रास्ते बंद होते हैं... ग्रामीण परेशान होते हैं... और फिर सामने आता है आश्वासन।
सवाल यही है कि क्या हर मानसून में वनांचल के गांव बाढ़, कीचड़ और टूटे संपर्क की मार झेलते रहेंगे, या कभी ऐसा स्थायी इंतजाम होगा कि बारिश उनके लिए मुसीबत नहीं, सिर्फ राहत और खुशहाली लेकर आएगी?
मुख्य बिंदु
नारायणपुर के अबूझमाड़ में सोनपुर नदी पर पुल नहीं होने से ग्रामीण परेशान
गरियाबंद में बेलाट नाला उफान पर, 36 गांवों का संपर्क प्रभावित
बलौदाबाजार में महानदी की बाढ़ से रीवासरार गांव बना टापू
बलरामपुर में सड़क की बदहाली के विरोध में ग्रामीणों ने सड़क पर की धान की रोपाई
सक्ती में तेज बहाव में बहे दो बाइक सवार, स्थानीय लोगों ने बचाया
हर मानसून में सामने आती है पुल, सड़क और संपर्क की समस्या
ग्रामीणों ने स्थायी समाधान और सुरक्षित आवागमन की मांग की
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
