धान की फसल पर मंडरा रहा खतरा : लोरमी में आवारा मवेशियों का आतंक, धान की फसल चौपट होने से परेशान किसान

लोकेशन — लोरमी, मुंगेली, छत्तीसगढ़
रिपोर्टर — प्रीतम दिवाकर
लोरमी। छत्तीसगढ़ के लोरमी क्षेत्र में आवारा और गुमंतू मवेशी किसानों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बने हुए हैं। खेतों में घुसकर मवेशी धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। लगातार बारिश के बीच किसान रात-रातभर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
किसानों का आरोप है कि शासन-प्रशासन की ओर से आवारा मवेशियों की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। यही वजह है कि गांवों से लेकर मुख्य मार्गों तक बड़ी संख्या में मवेशी खुले में घूमते नजर आते हैं। सड़क पर मवेशियों के जमावड़े से आए दिन हादसों का खतरा भी बना रहता है।
सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा, हादसों का खतरा
आवारा मवेशी सिर्फ किसानों के खेतों के लिए ही परेशानी नहीं हैं, बल्कि मुख्य सड़कों पर भी इनके बैठे रहने से वाहन चालकों के लिए खतरा बना रहता है। अचानक सड़क पर मवेशियों के आ जाने से कई बार वाहन चालक हादसे का शिकार हो जाते हैं।
किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि जब किसी मवेशी के साथ सड़क हादसा होता है, तो उसके मालिक मुआवजे की मांग को लेकर सामने आ जाते हैं, लेकिन खुले में घूम रहे मवेशियों की जिम्मेदारी लेने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए कोई आगे नहीं आता।
लोरमी में धान की फसल पर मंडरा रहा खतरा
ऐसा ही मामला लोरमी क्षेत्र से सामने आया है, जहां बड़ी संख्या में आवारा मवेशी किसानों के खेतों में पहुंचकर धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
बरसात के मौसम में खेतों में फसल तैयार हो रही है। ऐसे समय में मवेशियों के झुंड खेतों में पहुंचकर खड़ी फसल को रौंद रहे हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि तेज बारिश और बिजली की कड़कड़ाहट के बीच किसान अपनी फसल बचाने के लिए खेतों में उतरकर मवेशियों को खदेड़ रहे हैं।
रात में खेतों की रखवाली करने मजबूर किसान
किसानों का कहना है कि दिन के साथ-साथ रात में भी आवारा मवेशियों का झुंड खेतों में पहुंच जाता है। ऐसे में अन्नदाताओं को अपनी फसल बचाने के लिए रात के अंधेरे और बारिश के बीच खेतों में पहरा देना पड़ रहा है।
पेन्ड्रीतलाब क्षेत्र के किसानों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि मवेशियों को जंगल की ओर ले जाकर छोड़ने पर भी उन्हें सामाजिक संगठनों के विरोध का सामना करना पड़ता है।
किसानों के मुताबिक, मवेशियों को जंगल की तरफ ले जाने पर कुछ सामाजिक संस्थाओं द्वारा उन्हें पकड़कर बूचड़खाने ले जाने का आरोप लगाया जाता है। इसी डर के कारण ग्रामीण और किसान मवेशियों को दूर ले जाने से भी बचते हैं।
किसानों ने की समस्या के स्थायी समाधान की मांग
आवारा मवेशियों की वजह से लगातार फसल को हो रहे नुकसान से किसान परेशान हैं। उनका कहना है कि एक तरफ खेती की लागत बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी तरफ तैयार फसल मवेशियों की वजह से बर्बाद हो रही है।
पीड़ित किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए आवारा और गुमंतू मवेशियों के लिए सुरक्षित व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों की फसल भी बच सके और सड़कों पर होने वाले हादसों का खतरा भी कम हो।
निष्कर्ष
फिलहाल लोरमी क्षेत्र में आवारा मवेशियों की समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। किसान बारिश और रात के अंधेरे में अपनी फसल बचाने के लिए खेतों में पहरा देने को मजबूर हैं। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकालता है और किसानों को आवारा मवेशियों से हो रहे नुकसान से कब राहत मिलती है।
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
