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बच्चों की कल्पनाओं को नई उड़ान देगी ‘लिटिल थॉमस’ : मां के किरदार में नजर आएंगी रसिका दुग्गल, बोलीं—ऐसी फिल्में बेहद जरूरी

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 23, 2026
07:22 AM
मां के किरदार में नजर आएंगी रसिका दुग्गल, बोलीं—ऐसी फिल्में बेहद जरूरी

मुंबई। मनोरंजन के साथ बच्चों की कल्पनाशक्ति और जिज्ञासा को बढ़ावा देने वाली फिल्मों की जरूरत पर अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने जोर दिया है। उनकी आगामी फिल्म ‘लिटिल थॉमस’ इसी सोच को पर्दे पर उतारने की कोशिश करती है। अभिनेत्री का मानना है कि बच्चों के लिए ऐसी कहानियां बनाई जानी चाहिए, जिनमें वे अपने अनुभवों और भावनाओं को पहचान सकें और अपनी दुनिया को नए नजरिए से देख सकें।

‘बच्चों की जिज्ञासा को समझना जरूरी’

रसिका दुग्गल ने कहा कि सिनेमा बच्चों की दुनिया को बड़ा करने और उनकी कल्पनाशक्ति को विकसित करने का प्रभावशाली माध्यम है। बचपन में देखी गई फिल्में और कहानियां बड़े होने पर भी हमारी सोच को प्रभावित करती हैं। इसलिए बच्चों के लिए ऐसी फिल्में जरूरी हैं, जो उनकी जिज्ञासा को दबाने के बजाय उसे प्रोत्साहित करें।

अभिनेत्री के मुताबिक, बच्चों का मनोरंजन करने के लिए कहानी का हल्का-फुल्का होना ही जरूरी नहीं है। गंभीर भावनाओं और वास्तविक अनुभवों को भी रोचक अंदाज में पेश किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ज्यादा से ज्यादा फिल्ममेकर बच्चों के नजरिए से कहानियां कहने का प्रयास करेंगे।

जेसी मिरांडा के किरदार में दिखेंगी रसिका

कौशल ओझा के निर्देशन में बनी ‘लिटिल थॉमस’ में रसिका दुग्गल जेसी मिरांडा की भूमिका निभा रही हैं। जेसी एक ऐसी मां हैं, जिनकी जिंदगी अपने परिवार, बेकरी और संगीत के प्रति प्रेम के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में गुलशन देवैया और बाल कलाकार हृदांश पारेख भी अहम भूमिकाओं में हैं। कहानी 1990 के दशक के गोवा में रहने वाले सात वर्षीय थॉमस और उसके परिवार के जीवन के उतार-चढ़ाव को दिखाती है।

बचपन के सवालों से बुनी गई कहानी

‘लिटिल थॉमस’ की खासियत दुनिया को एक बच्चे की नजर से देखने का इसका अंदाज है। कहानी में थॉमस की जिज्ञासाएं, उसके मासूम सवाल और उनके जवाब जानने की जिद कई दिलचस्प परिस्थितियों को जन्म देती हैं। पारिवारिक रिश्तों और रोजमर्रा की घटनाओं के जरिए फिल्म बचपन की सहजता को सामने लाती है।

फिल्म का परिवेश मालगुडी डेज और रस्किन बॉन्ड की कहानियों की याद दिलाने वाला बताया गया है, जहां छोटे-छोटे अनुभवों में जीवन के बड़े अर्थ छिपे होते हैं।

बच्चों के सिनेमा को लेकर नई उम्मीद

रसिका दुग्गल का मानना है कि अच्छी बाल फिल्में बच्चों को सिर्फ मनोरंजन नहीं देतीं, बल्कि उन्हें सवाल पूछने, कल्पना करने और आसपास की दुनिया को समझने का अवसर भी देती हैं। ‘लिटिल थॉमस’ इसी सोच के साथ बचपन, परिवार और जिज्ञासा की दुनिया को पर्दे पर लाने का प्रयास करती है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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