अमेरिका-ईरान समझौते से बाजार गुलजार : कच्चे तेल में गिरावट से निवेशकों उत्साह, रुपए ने भरा दम

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की दिशा में बढ़ते कदमों का असर भारतीय वित्तीय बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। लगातार दूसरे दिन देश के प्रमुख शेयर सूचकांकों में मजबूती दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
मंगलवार को कारोबार की शुरुआत उत्साहजनक रही। मुंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक शुरुआती कारोबार में 76 हजार 500 अंक के स्तर को पार कर गया। वहीं राष्ट्रीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक भी बढ़त के साथ 24 हजार अंक के करीब पहुंच गया। निवेशकों की सक्रिय खरीदारी के चलते बाजार में शुरुआत से ही तेजी का रुख देखने को मिला।
तेल कीमतों में गिरावट बनी बड़ी वजह
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तेजी का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की घोषणा के बाद वैश्विक तेल बाजार में दबाव बढ़ा है। इसके चलते तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हुई हैं। इससे तेल और गैस संकट की आशंकाएं भी घट गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में उछाल
कारोबार की शुरुआत में कई बड़ी और मध्यम श्रेणी की कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, ऊर्जा और आधारभूत संरचना से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। इससे बाजार की व्यापक धारणा मजबूत हुई।
रुपये को भी मिला सहारा
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखाई दिया। डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होकर खुला। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल आयात पर खर्च कम होने की संभावना से विदेशी मुद्रा बाजार में भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।
आगे क्या रहेगा रुख
बाजार जानकारों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहती है और तेल की कीमतों में स्थिरता रहती है, तो भारतीय बाजारों में सकारात्मक माहौल आगे भी जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रमों और आर्थिक संकेतकों पर बनी हुई है।
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