शेयर बाजार में हाहाकार! : 24 घंटे में दूसरी बार धड़ाम, PM मोदी की अपील से मचा डर, निवेशकों के करोड़ों स्वाहा

मुंबई। देश के शेयर बाजार में मंगलवार को भी जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों को उम्मीद थी कि बाजार संभल जाएगा, लेकिन सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन हालात और बिगड़ते नजर आए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 700 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 160 अंकों से अधिक फिसल गया। बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया और कई शेयर तेजी से लाल निशान में चले गए।
खुलते ही बिखर गया बाजार
बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,015 के मुकाबले गिरावट के साथ 75,688 पर खुला। शुरुआती कुछ मिनटों में ही बिकवाली इतनी तेज हो गई कि सेंसेक्स 723 अंक टूटकर 75,291 तक पहुंच गया। दूसरी ओर निफ्टी भी 23,815 से गिरकर 23,722 पर खुला और कुछ ही देर में 23,633 तक लुढ़क गया। बाजार में चौतरफा दबाव देखने को मिला और निवेशकों के करोड़ों रुपये मिनटों में डूब गए।
आईटी सेक्टर में सबसे बड़ा झटका
मंगलवार की गिरावट में सबसे ज्यादा मार आईटी कंपनियों पर पड़ी। देश की दिग्गज टेक कंपनियों के शेयर बुरी तरह टूटते दिखाई दिए। TCS में 3.61 फीसदी, Infosys में 3.30 फीसदी, Tech Mahindra में 2.80 फीसदी और HCL Tech में 2.30 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा मिडकैप शेयरों में भी भारी दबाव देखने को मिला। UPL, Hindustan Petroleum और Coforge जैसे शेयरों में 3 से 4 फीसदी तक की गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।
PM मोदी की अपील से क्यों बढ़ा डर?
बाजार में गिरावट के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि भारत के आसपास युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। मंगलवार को पीएम मोदी ने अपनी अपील को दोहराया, जिसके बाद बाजार में डर और बढ़ गया। निवेशकों को आशंका है कि आने वाले दिनों में महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
मिडिल ईस्ट संकट ने बढ़ाई टेंशन
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 105 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो भारत में महंगाई और आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ सकता है।
निवेशकों में बढ़ी बेचैनी
लगातार दूसरे दिन आई भारी गिरावट ने छोटे निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश में जुटे हैं। जानकारों का कहना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में राहत नहीं मिलती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
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