बदल जेल के नियम : अब 5 कैदियों के लिए होगी एक शौचालय शीट, 1968 के बाद बदलाव

भोपाल। राज्य सरकार ने वर्ष 1968 के मध्य प्रदेश जेल अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए पुराने और अप्रासंगिक नियमों को हटाकर कई नए प्रावधान जोड़े हैं। इन बदलावों का उद्देश्य जेल व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और मानवीय बनाना बताया जा रहा है।
शौचालय व्यवस्था में सुधार
नए प्रावधान के तहत पहली बार जेल मैन्युअल में यह स्पष्ट किया गया है कि पांच कैदियों के बीच एक शौचालय सीट की व्यवस्था अनिवार्य होगी। इससे पहले जेल मुख्यालय के स्तर पर आठ कैदियों पर एक शौचालय सीट का प्रावधान लागू था।
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कैदियों की नई परिभाषा तय
संशोधित नियमों में आदतन और गैर-आदतन अपराधियों की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्षों की अवधि में कम से कम दो अलग-अलग मामलों में सजा प्राप्त करता है, तो उसे आदतन अपराधी माना जाएगा, जबकि अन्य को गैर-आदतन श्रेणी में रखा जाएगा। दोनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग रख-रखाव और व्यवस्थाएं तय की जाएंगी।
भोजन व्यवस्था में बदलाव
जेल में भोजन बनाने वाली टीम में अब केवल गैर-आदतन अपराधियों को शामिल किया जाएगा। यदि कोई बंदी इस व्यवस्था पर आपत्ति जताता है और भोजन लेने से इनकार करता है, तो उसे दंडस्वरूप भोजन निर्माण कार्य में लगाया जा सकेगा, जहां उसे अन्य सभी कैदियों का भोजन तैयार करना होगा।
आधुनिक सुविधाओं की शुरुआत
बड़े जेल परिसरों में सुधार के तहत अब केंद्रीय और जिला जेलों में स्वचालित कपड़ा धुलाई मशीनों की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही कैदियों के गीले कपड़ों को सुखाने के लिए भी उचित सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
सरकार का कहना है कि ये बदलाव जेल प्रशासन को अधिक आधुनिक, अनुशासित और मानवीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
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नीरज द्विवेदी
5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।
