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महाकाल कॉरिडोर के पास जमीन सौदे पर EOW में शिकायत : 31 करोड़ की जमीन 3.82 करोड़ में बेचने के आरोप से मचा बवाल

आलोक त्रिपाठी

आलोक त्रिपाठी

May 19, 2026
04:41 PM
31 करोड़ की जमीन 3.82 करोड़ में बेचने के आरोप से मचा बवाल

सरकारी जमीन का सीक्रेट सौदा बेनकाब

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर के आसपास की बेशकीमती सरकारी जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि करीब 31 करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी भूमि को रिकॉर्ड में हेरफेर कर निजी नामों पर ट्रांसफर किया गया और बाद में बेहद कम कीमत पर बेच दिया गया। अब इसी जमीन पर फाइव स्टार होटल प्रोजेक्ट की तैयारी की बात सामने आ रही है। मामले को लेकर कांग्रेस पार्षद ने मुख्य सचिव, लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से शिकायत की है। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है।

बीजेपी विधायक से जुड़ी कंपनी पर जमीन खरीदने के आरोप

जानकारी के अनुसार, 4180 वर्गमीटर भूमि को ‘यूटोपिया बोटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ ने 2 मार्च 2026 को करीब 3.82 करोड़ रुपए में खरीदा था। कंपनी के डायरेक्टर्स में भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय और भाजपा नेता इकबाल सिंह गांधी के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

अधिकारियों की मिलीभगत

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित जमीन मूल रूप से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी, लेकिन अधिकारियों की कथित मिलीभगत से इसे निजी भूमि के रूप में दर्ज कर दिया गया। इतना ही नहीं, जमीन पर पहले से मौजूद निर्माण कार्यों को दस्तावेजों में छिपाया गया और व्यावसायिक उपयोग वाली जमीन को कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री कर दी गई। कलेक्टर गाइडलाइन के मुताबिक इस क्षेत्र में जमीन की दर लगभग 75,400 रुपए प्रति वर्गमीटर होनी चाहिए थी, जबकि रजिस्ट्री मात्र 22,500 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से कराई गई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जमीन की वास्तविक कीमत करीब 31.51 करोड़ रुपए थी।

रजिस्ट्री मे हुआ बड़ा खेल

आरोप है कि कम कीमत दर्शाने के कारण सरकार को स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। जहां नियमानुसार करीब 2.99 करोड़ रुपए स्टांप ड्यूटी और 94.55 लाख रुपए पंजीयन शुल्क मिलना चाहिए था, वहीं केवल 40.36 लाख रुपए स्टांप शुल्क और 12.90 लाख रुपए रजिस्ट्रेशन फीस जमा कराई गई।

मामले पर मंदिर प्रबंधन का जवाब

मामले पर महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन ने कहा है कि संबंधित जानकारी नगर निगम स्तर से स्पष्ट हो सकेगी। वहीं भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने सभी आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह वैध बताया है। लोकायुक्त और EOW में शिकायत दर्ज होने के बाद अब मामले की उच्च स्तरीय जांच की संभावना जताई जा रही

आलोक त्रिपाठी
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आलोक त्रिपाठी

खबरों की खोज जारी है। ग्राउंड रिपोर्टिंग में दिलचस्पी। मध्य प्रदेश की खबरनवीसी का खास शौक।

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